सिर्फ 2 भैंसों से शुरू कर बनाया 40 भैंसों का डेयरी फार्म जानिए कैसे

फेल होने के डर से मात्र 2 भैंसों से शुरू किया था डेयरी फार्म, आज 40 टॉप मुर्रा भैंसों के मालिक हैं यादव जी। नए डेयरी फार्मर्स के लिए जानें फीडिंग और शेड बनाने के स्मार्ट तरीके।

Sandeep Kumar Singh
20 अक्टूबर 2026, (अपडेटेड 20 अक्टूबर 2026, 6:52 AM IST) • 6 मिनट पढ़े

भारत में पशुपालन (Pashupalan) कोई नया काम नहीं है। गांवों में बहुत से लोगों के पास एक-दो भैंसें होती हैं और वे अक्सर सपना देखते हैं कि उनका भी एक बड़ा डेयरी फार्म हो। लेकिन जानकारी की कमी के कारण वे कदम आगे नहीं बढ़ा पाते। आज हम आपको एक ऐसे डेयरी फार्मर (यादव जी) की कहानी बताने जा रहे हैं, जिन्होंने किसी बड़े इन्वेस्टमेंट के बजाय मात्र दो भैंसों से अपने डेयरी फार्मिंग (Dairy Farming) की शुरुआत की थी। आज 9-10 सालों की कड़ी मेहनत के बाद उनके पास करीब 40 टॉप नस्ल की मुर्रा भैंसें हैं और उनका पूरा परिवार मिलकर इस शानदार बिजनेस को चला रहा है।

5 मुख्य बातें

  • यादव जी ने फेल होने के डर से मात्र 2 भैंसों से अपने डेयरी बिजनेस की शुरुआत की थी।
  • 9-10 सालों में उनका फार्म 2 भैंसों से बढ़कर 40 (बच्चों सहित) भैंसों का हो गया है।
  • यादव जी पंजाब (सिरसा की मंडी) से 2 से 3 लाख रुपये तक की टॉप मुर्रा भैंसें लाते हैं।
  • फार्म को साफ रखने के लिए भैंसों को अंदर शेड और बाहर मैदान (खुले में) बांधने का रूटीन है।
  • वे नए फार्मर्स को एक साथ ज्यादा भैंसें खरीदने और 'पड़िया' (पहली ब्यात की भैंस) लाने से मना करते हैं।

2 भैंसों से 40 भैंसों तक का सफर

करीब 9-10 साल पहले यादव जी के पास खेती के लिए 7-8 बीघा जमीन हुआ करती थी। उन्होंने डेयरी का काम शुरू करने का मन बनाया। शुरुआत में उनका प्लान 30-40 भैंसें रखने का था, लेकिन फेल हो जाने के डर से उन्होंने सिर्फ दो भैंसों से शुरुआत की।

वे पंजाब से अच्छी नस्ल की दो भैंसें लाए। जब भैंसों ने 15-16 लीटर दूध देना शुरू किया और मुनाफा दिखने लगा, तो उनका काम धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगा। जैसे-जैसे आमदनी बढ़ती गई, वे नई भैंसें लाते गए। आज उनके फार्म में 35 बड़ी भैंसें और बच्चों को मिलाकर 40 से ज्यादा जानवर हैं। खेती की जमीन भी 7 बीघे से बढ़कर 20 बीघे हो गई है। उनके इस फार्म में 2.5 लाख से लेकर 3 लाख रुपये तक की टॉप मुर्रा भैंसें मौजूद हैं जो रोजाना 18 लीटर तक दूध देती हैं।

कम खर्चे वाला खुला और साफ-सुथरा फार्म

ज्यादातर लोग डेयरी फार्म (Dairy Farm) बनाते समय बड़े और महंगे शेड (TMR वाले) बनवाते हैं, जिसमें बीच से चारा डाला जाता है। लेकिन यादव जी ने एक लंबा और सिंपल शेड बनाया है। उनके फार्म में साफ-सफाई का खास ध्यान रखा जाता है।

रात को भैंसों को शेड के अंदर चारा खिलाने के लिए बांधा जाता है। सुबह नहलाने के बाद दूध निकालकर उन्हें बाहर खुले मैदान में बांध दिया जाता है। इससे शेड के अंदर धुलाई अच्छे से हो जाती है और जमीन सूख जाती है। खुले में बांधने से भैंसों को कीड़े-मकोड़े और मच्छरों से भी बचाव होता है।

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दूध के हिसाब से फीडिंग का स्मार्ट मैनेजमेंट

यादव जी का शहर से डेयरी की दूरी 12-13 किलोमीटर है और वहां दूध का रेट ज्यादा नहीं मिलता (लगभग 60 रुपये लीटर)। इस रेट में अगर हर जानवर को दाना (राशन) दिया जाए, तो डेयरी घाटे में चली जाएगी। इसलिए वे फीडिंग (Feeding) में बहुत स्मार्ट तरीका अपनाते हैं।

जो भैंसें दूध दे रही हैं, उन्हें ही दाना और राशन दिया जाता है। जो भैंसें दूध नहीं दे रही हैं (Dry Period में हैं), उन्हें सिर्फ हरा चारा और सूखा भूसा खिलाया जाता है। वे 700-800 क्विंटल भूसा खरीदकर स्टॉक कर लेते हैं और अपने खेत में 5-6 बीघा हरा चारा भी उगाते हैं।

डेयरी फार्मिंग में क्या करें (Do's)क्या न करें (Don'ts)
शुरुआत हमेशा 2-4 भैंसों से करें ताकि अनुभव मिले।एक साथ 10 भैंसें (एक मोटर) कभी न खरीदें।
तीसरी ब्यात (ब्याण) की अच्छी दूध देने वाली भैंस लाएं।पहली ब्यात वाली (पड़िया) भैंस लाने का रिस्क न लें।
भैंसों को 2-4 बार नहलाएं और चारे में पानी दें।बिना सही ट्रेनिंग और नॉलेज के इस बिजनेस में न उतरें।

नए फार्मर्स के लिए यादव जी की चेतावनी

यादव जी चेतावनी देते हैं कि नए लोगों को डेयरी खोलते समय एक साथ 10 भैंसें (एक मोटर) नहीं लानी चाहिए। अगर 10 भैंसें एक साथ ड्राई हो गईं (दूध देना बंद कर दिया), तो 20 लाख रुपये की पूंजी फंस जाएगी और उन्हें खिलाना भारी पड़ जाएगा।

इसके अलावा, नए लोगों को कभी भी पहली ब्यात की भैंस (पड़िया) नहीं लानी चाहिए, क्योंकि अगर वह अगली बार गाभिन नहीं हुई, तो पैसा डूब जाएगा। हमेशा तीसरी ब्यात की भैंस लाएं जो अच्छा दूध देती हो। किसी भी बिजनेस की तरह डेयरी फार्मिंग भी एक टेक्निकल काम है, जिसे बिना सही जानकारी (Knowledge) के शुरू करने पर फेल होने का खतरा रहता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

डेयरी फार्म की शुरुआत कितनी भैंसों से करनी चाहिए?

नए लोगों को फेल होने के रिस्क से बचने के लिए हमेशा 2 से 4 भैंसों से ही डेयरी फार्म की शुरुआत करनी चाहिए।

पंजाब की एक अच्छी मुर्रा भैंस की कीमत कितनी होती है?

एक टॉप नस्ल की मुर्रा भैंस जो 15 से 18 लीटर दूध देती है, उसकी कीमत 2.5 लाख से 3 लाख रुपये तक हो सकती है।

दूध न देने वाली (ड्राई) भैंसों को क्या खिलाना चाहिए?

जो भैंसें दूध नहीं दे रही हैं, उन्हें दाना (राशन) देने के बजाय सिर्फ हरा चारा और सूखा भूसा खिलाना चाहिए ताकि खर्च कम हो।

नए डेयरी फार्मर्स को पहली ब्यात (पड़िया) की भैंस क्यों नहीं लेनी चाहिए?

पहली ब्यात की भैंस 10 लीटर के अंदर ही दूध देती है और अगर वह अगली बार गाभिन (प्रेग्नेंट) नहीं हुई, तो फार्मर का पैसा डूब सकता है।

भैंसों को शेड से बाहर क्यों बांधना चाहिए?

भैंसों को बाहर खुले में बांधने से शेड की धुलाई अच्छे से हो जाती है, जमीन सूख जाती है और कीड़े-मच्छरों से बचाव होता है।

कृषि एवं व्यापार अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख एक डेयरी फार्मर के निजी अनुभवों और उनके फार्म मैनेजमेंट के तरीकों पर आधारित है। डेयरी फार्मिंग में लागत, दूध का उत्पादन और मुनाफा स्थानीय बाजार के रेट और जानवरों की नस्ल पर निर्भर करता है। पशुपालन का बड़ा बिजनेस शुरू करने से पहले पशु चिकित्सक (Vet) और अनुभवी लोगों से सलाह व ट्रेनिंग जरूर लें।

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