20 साल के युवा ने बतख पालन से शुरू की 50 हजार महीने की कमाई

मुजफ्फरपुर के 20 साल के युवा ने नौकरी छोड़ गांव में शुरू किया बतख पालन का बिजनेस। जानिए मात्र 500 बतखों और 10 कट्ठे जमीन से कैसे हो रही है 50 हजार महीने की कमाई।

Sandeep Kumar Singh
19 अक्टूबर 2026, (अपडेटेड 19 अक्टूबर 2026, 2:44 PM IST) • 5 मिनट पढ़े

आजकल बहुत से युवा नौकरी की तलाश में शहरों की तरफ भाग रहे हैं। लेकिन मुजफ्फरपुर के धर्मपुर शाह के रहने वाले मात्र 20 साल के अभय कुमार ने कुछ अलग करने की ठानी। उन्होंने अपनी जॉब छोड़कर गांव में ही बतख पालन (Batakh Palan) का बिजनेस शुरू किया। आज वह मात्र 500 बतखों से हर महीने करीब 50 हजार रुपये की शानदार कमाई कर रहे हैं। आइए समझते हैं उनके इस सफल बिजनेस का पूरा मॉडल और बारीकियां।

5 मुख्य बातें

  • मुजफ्फरपुर के अभय ने 10 कट्ठे जमीन में बतख पालन का सफल बिजनेस खड़ा किया है।
  • मात्र 500 बतखों से उन्हें डेली 320 से 350 अंडे मिल रहे हैं (80% प्रोडक्शन)।
  • एक अंडे की कीमत 11 रुपये है, जिससे दाना-पानी निकालकर हर दिन 1700 रुपये की बचत होती है।
  • फार्म में 80% इंडियन रनर और 20% खाकी कैंबेल बतखें पाली गई हैं।
  • ठंड के मौसम में अंडे का रेट घटने पर बतखों को धान खिलाकर 'रेस्ट मोड' पर रखा जाता है।

10 कट्ठे जमीन में कम खर्च वाला शानदार सेटअप

बतख पालन की सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें मुर्गियों के मुकाबले बहुत कम खर्च और मेंटेनेंस लगता है। बीमारी का खतरा भी कम होता है। अभय ने अपनी 10 कट्ठे जमीन का बहुत स्मार्ट तरीके से इस्तेमाल किया है। उन्होंने 80% (करीब 7-8 कट्ठे) जमीन में बतखों के तैरने के लिए तालाब बनवाया है और मात्र 10% हिस्से में शेड तैयार किया है।

इस 10x60 फीट के लंबे शेड को बनाने में बांस की फट्टी और जाली का इस्तेमाल किया गया है, जिसमें मुश्किल से 50 हजार रुपये का खर्च आया। फार्म के किनारे-किनारे मोरिंगा (सहजन) और नीम के पौधे लगाए गए हैं। बतखों के लिए छाया बहुत जरूरी है, क्योंकि ज्यादा गर्मी या स्ट्रेस होने पर बतखें अंडे देना कम कर देती हैं।

दाना, खर्च और मुनाफे का सीधा गणित

चूजों को बड़ा करने में लगने वाले 4 महीने के समय को बचाने के लिए अभय ने सीधे बड़ी बतखें खरीदी थीं। उन्होंने 1.5 लाख रुपये लगाकर 4 महीने की 600 बतखें (250 रुपये प्रति बतख) खरीदी थीं। कुछ बतखों की मौत और एक्स्ट्रा नर (Male) बतखों को बेचने के बाद अब उनके पास 500 बतखें हैं, जिनमें 70-80 नर हैं।

ये 500 बतखें डेली 60-65 किलो दाना खाती हैं, जिसका खर्च लगभग 1500 से 1700 रुपये आता है। इसके बदले फार्म से हर दिन 320 से 350 अंडे निकलते हैं। अभी बाजार में एक अंडा 11 रुपये में आसानी से बिक रहा है। दाने का पूरा खर्च निकालने के बाद अभय को हर दिन 1700 रुपये की सीधी बचत हो रही है।

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इंडियन रनर और खाकी कैंबेल का बेजोड़ संगम

इस फार्म में मुख्य रूप से दो वैरायटी की बतखें हैं। इसमें 80% 'इंडियन रनर' (Indian Runner) और 20% 'खाकी कैंबेल' (Khaki Campbell) हैं। खाकी कैंबेल साल में 300 अंडे देती है, लेकिन इसके अंडे का साइज थोड़ा छोटा होता है।

वहीं, इंडियन रनर साल में 280 अंडे देती है, लेकिन इसका अंडा बड़ा होता है, जिसकी मार्केट में अच्छी डिमांड है। इसलिए अभय भविष्य में भी इंडियन रनर ब्रीड पर ही ज्यादा फोकस करने वाले हैं।

ब्रीड और फार्म की खासियतअंडे और दाने का विवरण
खाकी कैंबेल साल में करीब 300 (छोटे) अंडे देती हैडेली 500 बतखें 60-65 किलो दाना खाती हैं
इंडियन रनर साल में 280 (बड़े आकार के) अंडे देती हैदाने का डेली खर्च 1500-1700 रुपये है
समय बचाने के लिए 4 महीने की बड़ी बतखें लाएंडेली 320-350 अंडे (80% प्रोडक्शन) मिलता है

सर्दियों में अपनाते हैं 'रेस्ट मोड' की खास ट्रिक

मुर्गियों के मामले में सर्दियों में अंडे का रेट बढ़ जाता है, लेकिन बतख पालन में इसका ठीक उल्टा होता है। अभय बताते हैं कि नवंबर-दिसंबर में हैचरी बंद रहने और चूजों के डैमेज होने के डर से बतख के अंडे का रेट गिरकर 7-8 रुपये पर आ जाता है।

घाटे से बचने के लिए वह सर्दियों में अपनी बतखों को 'रेस्ट मोड' पर डाल देते हैं। वह दाना कम करके उन्हें 80% धान और 20% दाना खिलाने लगते हैं। इससे अंडे आना बंद हो जाते हैं और बतखें शारीरिक रूप से ज्यादा तगड़ी और स्वस्थ हो जाती हैं। फिर जनवरी से जब रेट बढ़ता है, तो बतखें वापस पूरी क्षमता से अंडे देने लगती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

बतख पालन शुरू करने के लिए कितना खर्च आता है?

अगर आपके पास अपनी जमीन है, तो 500 बतखों के शेड, तालाब और फीडिंग के साथ लगभग 2.5 लाख रुपये में यह बिजनेस शुरू किया जा सकता है।

एक बतख कितने महीने में अंडे देना शुरू कर देती है?

अच्छी फीडिंग और देखभाल मिलने पर एक बतख 4 से 5 महीने की उम्र में अंडे देना शुरू कर देती है।

इंडियन रनर और खाकी कैंबेल में क्या अंतर है?

खाकी कैंबेल ज्यादा अंडे (300/साल) देती है लेकिन साइज छोटा होता है। इंडियन रनर थोड़े कम (280/साल) लेकिन बड़े आकार के अंडे देती है।

सर्दियों में बतख के अंडे का रेट कम क्यों हो जाता है?

सर्दियों (नवंबर-दिसंबर) में ज्यादा ठंड के कारण हैचरी बंद रहती हैं और चूजों का नुकसान होता है, जिससे अंडे की मांग और रेट घट जाता है।

बतखों को रेस्ट मोड पर कैसे डाला जाता है?

जब अंडों का रेट कम हो, तो बतखों का दाना कम करके उन्हें 80% धान खिलाया जाता है। इससे वे अंडे देना रोक देती हैं और स्वस्थ हो जाती हैं।

व्यापारिक अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख मुजफ्फरपुर के एक युवा किसान के व्यक्तिगत अनुभव और उनके बतख पालन मॉडल पर आधारित है। बतख पालन में लागत, अंडे का उत्पादन और मुनाफा स्थानीय बाजार के रेट और मौसम पर निर्भर करता है। कोई भी व्यवसाय शुरू करने से पहले विशेषज्ञों से उचित ट्रेनिंग और जानकारी जरूर प्राप्त करें।

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