अक्सर लोग खेती या पशुपालन को घाटे का सौदा मानते हैं, लेकिन अगर सही जानकारी और अच्छी नस्ल के साथ काम किया जाए, तो यह बिजनेस करोड़ों का टर्नओवर दे सकता है। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी पुणे के पास गोट फार्मिंग कर रही एक महिला की है, जिन्होंने पिछले 13 सालों में अपने फार्म को एक मुनाफे वाले बिजनेस में बदल दिया है। उनके फार्म पर मौजूद बकरियों की कीमत सुनकर बड़े-बड़े व्यापारी हैरान रह जाते हैं।
750 बकरियों से शुरू हुआ था सफर
इस फार्म की शुरुआत 2013 में हुई थी। उस समय फार्म पर बरबरी, उस्मानाबादी, बीटल और सिरोही जैसी अलग-अलग नस्लों की कुल 750 बकरियां थीं। लेकिन कई नस्लें होने के कारण मुनाफा ना के बराबर था। इसे देखते हुए 2017 में एक बड़ा फैसला लिया गया और सभी पुरानी नस्लों को हटाकर केवल फुल ब्लड साउथ अफ्रीकन बोयर बकरियों (Full Blood South African Boer Goats) पर फोकस किया गया। यह फैसला उनकी जिंदगी का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।

अफ्रीकन बोयर बकरी की खासियत
साउथ अफ्रीकन बोयर बकरी की सबसे बड़ी खासियत इसका तेजी से बढ़ने वाला वजन (Weight Gain) है। यह नस्ल किसी भी मौसम में खुद को ढाल सकती है, चाहे वह कश्मीर की कड़ाके की ठंड हो या राजस्थान की भयंकर गर्मी। आमतौर पर बोयर बकरी 6 महीने में ही 40 किलो तक का वजन हासिल कर लेती है। फार्म में मौजूद 'जुपिटर' नाम का एक ब्रीडर 2.5 साल का है और उसका वजन 120 किलो से भी ज्यादा है।
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फार्म का वैज्ञानिक सेटअप
यह फार्म 50x130 फीट के शेड में बना है, जिसमें कुल 23 कंपार्टमेंट हैं। हर कंपार्टमेंट में 7 से 8 बकरियां रखी जाती हैं। बकरियों के बाहर घूमने के लिए भी पर्याप्त जगह छोड़ी गई है। छोटे बच्चों को संक्रमण से बचाने के लिए एलिवेटेड (ऊंचाई वाले) सेक्शन में रखा जाता है, ताकि गंदगी से होने वाली बीमारियों से बचा जा सके। फार्म की साफ-सफाई हफ्ते में एक बार की जाती है।
बकरियों की सही पहचान के लिए मां और उसके बच्चों पर एक ही नंबर डाला जाता है। चारे में तुअर का भूसा, दशरथ घास, मेथी घास और शहतूत की पत्तियां मिक्स करके कुट्टी मशीन से काटकर खिलाई जाती हैं, ताकि सभी को पूरा पोषण मिल सके।

3 लाख रुपये में बिकती है एक बकरी
इस फार्म से बकरियां केवल ब्रीडिंग के लिए बेची जाती हैं। मेल (Male) बोयर की कीमत सवा लाख से दो लाख रुपये के बीच होती है, जबकि फीमेल (Female) की कीमत 3 लाख रुपये से भी ऊपर चली जाती है। इन बकरियों की डिमांड न केवल पूरे भारत में (जम्मू से कन्याकुमारी तक) है, बल्कि नेपाल, श्रीलंका और म्यांमार जैसे एशियाई देशों में भी एक्सपोर्ट किया जाता है।
| गोट फार्मिंग के नियम | क्या बिल्कुल न करें |
| वजन तेजी से बढ़ाने वाली अच्छी नस्ल (जैसे बोयर) चुनें | शुरुआत में एक साथ बहुत सी अलग-अलग नस्लें न रखें |
| बच्चों को गंदगी और संक्रमण से बचाने के लिए ऊंचाई पर रखें | बच्चों को जन्म के तुरंत बाद मां से अलग न करें (कम से कम 10 दिन साथ रखें) |
| सभी बकरियों को मिक्स चारा दें ताकि पूरा पोषण मिले | बकरियों की सही पहचान के लिए नंबरिंग करना न भूलें |
पिछले साल उन्होंने 90 जानवर बेचे, जिससे उन्हें 1.5 करोड़ रुपये की कमाई हुई। इसमें से 40 लाख रुपये का खर्च निकाल दें, तो भी उन्हें 1.10 करोड़ रुपये से ज्यादा का शुद्ध मुनाफा हुआ। अब वे 500 जानवरों की क्षमता वाला एक नया फार्म भी तैयार कर रही हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
साउथ अफ्रीकन बोयर बकरी की क्या खासियत है? इस नस्ल का वजन बहुत तेजी से बढ़ता है और यह किसी भी मौसम (ठंड या गर्मी) में आसानी से सर्वाइव कर सकती है।
बोयर बकरी 6 महीने में कितना वजन हासिल करती है? सही खुराक और देखभाल से बोयर बकरी 6 महीने में 40 किलो तक का वजन हासिल कर लेती है।
छोटे मेमनों को एलिवेटेड बाड़े में क्यों रखा जाता है? छोटे बच्चों को जमीन की गंदगी और संक्रमण से बचाने के लिए ऊंचाई वाले (एलिवेटेड) बाड़े में रखा जाता है, ताकि वे बीमार न पड़ें।
गोट फार्मिंग में पहचान के लिए क्या तरीका अपनाया जाता है? बकरियों और उनके बच्चों की सही पहचान के लिए उनके शरीर पर नंबर डाले जाते हैं, जिससे रिकॉर्ड रखने में आसानी होती है।
क्या गोट फार्मिंग से करोड़ों का मुनाफा संभव है? हां, अगर अच्छी नस्ल (जैसे फुल ब्लड बोयर) पर फोकस किया जाए और सही मार्केट में ब्रीडिंग के लिए सेल किया जाए, तो गोट फार्मिंग से भारी मुनाफा कमाया जा सकता है।
व्यावसायिक एवं चिकित्सीय अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख एक गोट फार्मर के व्यक्तिगत अनुभवों और उनके द्वारा बताए गए आंकड़ों पर आधारित है। पशुपालन व्यवसाय में बाजार के जोखिम और जानवरों की सेहत से जुड़ी चुनौतियां शामिल होती हैं। पशुओं की बीमारी, दवाओं के उपयोग या किसी भी नए व्यवसाय को शुरू करने से पहले हमेशा प्रमाणित पशु चिकित्सक (Veterinarian) या कृषि विशेषज्ञों की सलाह अवश्य लें।










