बकरी पालन के व्यवसाय में लाखों की कमाई की कहानियां तो आपने बहुत सुनी होंगी। लेकिन जमीन पर इस व्यवसाय की शुरुआत कैसे होती है और इसमें कितना संघर्ष होता है यह जानना भी बेहद जरूरी है। मुजफ्फरपुर के रहने वाले सुमित कुमार पहले प्लंबर का काम करते थे। प्लंबिंग के काम में उन्हें महीने में बमुश्किल दस दिन ही रोजगार मिल पाता था जिससे घर चलाना मुश्किल हो रहा था। अपने पड़ोस में अमरजीत जी को गोट फार्मिंग करते देख सुमित ने भी इस क्षेत्र में कदम रखने का मन बनाया। आज वह अपनी मेहनत और सूझबूझ से एक बेहतरीन गोट फार्म चला रहे हैं।

बिना ट्रेनिंग के गोट फार्मिंग है जोखिम भरा काम
बकरी पालन में कदम रखने से पहले सुमित ने मुजफ्फरपुर स्थित आरसेटी से विधिवत प्रशिक्षण लिया। इसके साथ ही उन्होंने चार-पांच अलग-अलग गोट फार्म का दौरा भी किया। सुमित का मानना है कि केवल दूसरों की देखा-देखी फार्म शुरू करना नुकसानदायक हो सकता है।
ट्रेनिंग का फायदा उन्हें तब मिला जब शुरुआत में उनकी बकरियों को दस्त और सुस्ती की समस्या हुई। बकरियां चारा चरने के बजाय शांत बैठी रहती थीं। सही जानकारी होने के कारण सुमित ने तुरंत नेबलॉन पाउडर, मेलोनेक्स प्लस और एनरोफ्लोक्सासिन का इस्तेमाल किया जिससे सभी बकरियां जल्द स्वस्थ हो गईं।

1 लाख रुपये में 50 बकरियों का शानदार शेड
सुमित ने फार्म बनाने के लिए 12 कट्ठा जमीन 12 हजार रुपये सालाना लीज पर ली है। इस जमीन पर मिट्टी भराई में 15 हजार रुपये लगे। इसके बाद उन्होंने करीब 1 लाख रुपये के खर्च में 50 बाय 24 फीट का एक बहुत ही शानदार और हवादार शेड तैयार किया।
शेड का डिजाइन बहुत ही वैज्ञानिक तरीके से बनाया गया है। नीचे से 6 फीट तक शेड को पैक रखा गया है और उसके ऊपर 2 फीट की जाली लगाई गई है ताकि बकरियों को सीधी हवा न लगे और वेंटिलेशन भी बना रहे। फार्म की बीच की ऊंचाई 10 फीट रखी गई है। संक्रमण से बचाव के लिए फर्श पर नियमित रूप से चूने का छिड़काव किया जाता है। आने वाले समय में गाभिन बकरियों और छोटे मेमनों के लिए 10 बाय 10 फीट के अलग-अलग कंपार्टमेंट बनाए जाएंगे।

हेयर डाई से निकाला पहचान का अनोखा जुगाड़
फार्म में फिलहाल ब्लैक बंगाल और कुछ राजस्थानी क्रॉस नस्ल की 28 से 30 बकरियां हैं। इसके अलावा 18 हजार रुपये में खरीदा गया एक शानदार ब्रीडर भी है। सुमित ने गांव-गांव घूमकर अच्छी नस्ल की बकरियां 55 से 60 हजार रुपये में खरीदी हैं।
फार्म में सभी बकरियां एक ही रंग की होने के कारण उनकी पहचान करना मुश्किल होता था। इसके समाधान के लिए सुमित ने बालों में लगाने वाली हेयर डाई से बकरियों के शरीर पर नंबर लिख दिए हैं। इस अनोखे जुगाड़ से बकरियों के टीकाकरण और उनके गाभिन होने का सही रिकॉर्ड रखना बहुत आसान हो गया है। बकरियों को चराई के साथ-साथ चने का खोइया और चोकर भी दिया जा रहा है। फार्म के बाहर खाली जमीन में नेपियर और जनेरा जैसे हरे चारे की बुवाई की जा रही है ताकि भविष्य में चारे की कोई कमी न हो।
| बकरी पालन के जरूरी नियम | क्या बिल्कुल न करें |
| हमेशा किसी मान्यता प्राप्त संस्था से ट्रेनिंग लेकर ही शुरुआत करें | दूसरों की देखा-देखी बिना अनुभव के काम शुरू न करें |
| बकरियों की पहचान के लिए शरीर पर नंबरिंग जरूर करें | गाभिन बकरी और छोटे मेमनों को एक साथ बड़े बाड़े में न रखें |
| फार्म में हवा आने-जाने के लिए जालीदार खिड़कियां बनाएं | बकरियों को केवल सूखे चारे पर निर्भर न रखें |
| बीमारी होने पर तुरंत सही दवाओं का इस्तेमाल करें | शेड की साफ-सफाई और चूने के छिड़काव में लापरवाही न करें |
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
बकरी पालन शुरू करने से पहले ट्रेनिंग क्यों जरूरी है?
ट्रेनिंग लेने से आपको बकरियों की बीमारियों, उनके इलाज और फार्म के सही प्रबंधन की वैज्ञानिक जानकारी मिलती है जिससे भविष्य में नुकसान का खतरा कम हो जाता है।
कम खर्च में बकरी पालन के लिए जमीन कैसे लें?
कम पूंजी होने पर जमीन खरीदने के बजाय सुमित की तरह गांव के आसपास लीज या किराए पर जमीन लेकर शेड बनाना एक समझदारी भरा और किफायती कदम है।
गोट फार्मिंग में ब्लैक बंगाल नस्ल क्यों खास है?
ब्लैक बंगाल नस्ल की रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत अच्छी होती है और इसके मांस की बाजार में काफी मांग रहती है जिससे किसानों को अच्छा मुनाफा मिलता है।
बकरियों की पहचान के लिए सस्ता तरीका क्या है?
बकरियों के शरीर पर हेयर डाई की मदद से नंबर लिखकर उनकी पहचान तय की जा सकती है जिससे उनके खान-पान और दवाओं का सही रिकॉर्ड रखा जा सके।
गोट फार्म के शेड की ऊंचाई कितनी होनी चाहिए?
शेड के बीच की ऊंचाई कम से कम 10 फीट और साइड की ऊंचाई 8 फीट होनी चाहिए जिसमें हवा के संचार के लिए ऊपर की तरफ जाली लगी होनी चाहिए।
व्यावसायिक एवं चिकित्सीय अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख एक युवा किसान के व्यक्तिगत अनुभवों और उनके द्वारा अपनाए गए तरीकों पर आधारित है। पशुपालन व्यवसाय में बाजार के जोखिम और जानवरों की सेहत से जुड़ी चुनौतियां शामिल होती हैं। पशुओं की बीमारी, दवाओं के उपयोग या किसी भी नए डाइट प्लान के लिए हमेशा प्रमाणित पशु चिकित्सक (Veterinarian) की सलाह अवश्य लें।










