श्रीकृष्ण और राधा रानी के प्रेम की अनसुनी कहानियां!
भगवान श्रीकृष्ण की लीलाएं अनंत हैं। आइए जानते हैं उनकी बांसुरी के जन्म और राधा रानी के साथ उनके अटूट प्रेम की कुछ ऐसी कहानियां, जो शायद ही आपने सुनी होंगी।
कैसे बनी श्रीकृष्ण की जादुई बांसुरी?
एक दिन श्रीकृष्ण ने बांस के पेड़ से कहा कि उन्हें बांसुरी बनाने के लिए उसे काटना होगा। बांस ने खुशी-खुशी अपना अस्तित्व भगवान को सौंप दिया।
बांसुरी में फूंके अपने प्राण
श्रीकृष्ण ने अपने हाथों से उस बांसुरी को बनाया और उसमें प्राण फूंके। जब पहली बार उससे धुन निकली, तो पूरी प्रकृति मंत्रमुग्ध हो गई। उन्हें 'मुरली मनोहर' कहा जाने लगा।
क्यों तोड़ दी अपनी प्रिय बांसुरी?
जब राधा रानी का शरीर त्यागने का समय आया, तो कृष्ण ने उनके लिए दर्द भरी धुन बजाई। राधा के जाने के वियोग में उन्होंने अपनी बांसुरी तोड़कर यमुना किनारे छोड़ दी।
जन्म के बाद नहीं खोली थीं आंखें
राधा रानी के जन्म के बाद कई महीनों तक उन्होंने अपनी आंखें नहीं खोली थीं। उनकी माता कीर्ति इस बात से बहुत दुखी और परेशान रहती थीं।
पहली नज़र में केवल श्रीकृष्ण को देखा
जब बाल कृष्ण यशोदा माता के साथ राधा के घर गए और पालने में झांका, तब राधा रानी ने पहली बार अपनी आंखें खोलीं और सबसे पहले श्रीकृष्ण के दर्शन किए।
ब्रह्मा जी को नहीं हुआ था विश्वास
जब भगवान विष्णु आठवें अवतार में एक साधारण ग्वाले के रूप में धरती पर आए, तो ब्रह्मा जी को विश्वास नहीं हुआ। उन्होंने सभी ग्वालों और गायों को गायब कर दिया।
श्रीकृष्ण ने दिखाया असली रूप
हज़ारों साल बाद ब्रह्मा जी लौटे तो देखा कि सारी गाएं और ग्वाले वापस आ गए हैं। कृष्ण ने बताया कि ये सब उनका ही रूप हैं। यहीं से उनका नाम 'गोपाल' पड़ा।
देवराज इंद्र का टूटा घमंड
जब गोकुलवासियों ने इंद्र की जगह गोवर्धन पर्वत की पूजा की, तो इंद्र ने भयंकर तूफान भेज दिया। तब श्रीकृष्ण ने छोटी उंगली पर पर्वत उठाकर सबकी रक्षा की और 'गोविंद' कहलाए।
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