सितंबर महीने में आई भीषण बाढ़ और बारिश ने बिहार के कई जिलों में किसानों की कमर तोड़ कर रख दी थी। खेतों में लहलहाती फसल पानी में डूबकर पूरी तरह बर्बाद हो गई। लेकिन अब बिहार सरकार के कृषि विभाग ने किसानों को बड़ी राहत दी है। राज्य में कृषि इनपुट अनुदान (Krishi Input Anudan) योजना के तहत दोबारा ऑनलाइन आवेदन शुरू कर दिए गए हैं। अगर आपकी भी फसल को नुकसान पहुंचा है, तो आप घर बैठे ऑनलाइन आवेदन करके सरकार से मुआवजे की राशि प्राप्त कर सकते हैं।
5 मुख्य बातें
- बिहार सरकार ने फसल नुकसान के लिए कृषि इनपुट अनुदान के आवेदन शुरू कर दिए हैं।
- यह लाभ 9 जिलों के 43 प्रखंडों और 289 पंचायतों के किसानों को ही मिलेगा।
- वर्षा आश्रित क्षेत्रों को ₹8,500 और सिंचित क्षेत्रों को ₹17,000 प्रति हेक्टेयर अनुदान मिलेगा।
- रैयत (जमीन मालिक) और गैर-रैयत (बटाईदार) दोनों तरह के किसान आवेदन कर सकते हैं।
- आवेदन करने की अंतिम तिथि 25 अक्टूबर (रात 10 बजे तक) निर्धारित की गई है।
किन 9 जिलों के किसानों को मिलेगा लाभ?
कृषि विभाग द्वारा जारी की गई अपडेट के अनुसार, सितंबर की बाढ़ से प्रभावित हुए 9 जिलों के 43 प्रखंडों और 289 पंचायतों को इस योजना में शामिल किया गया है। इन जिलों में मुख्य रूप से दरभंगा, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर, पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, वैशाली, सारण, कटिहार और पटना शामिल हैं।
सबसे पहले आपको डीबीटी एग्रीकल्चर (DBT Agriculture) की आधिकारिक वेबसाइट या 'उमेश टॉक' जैसे पोर्टल पर जाकर लिस्ट चेक करनी होगी कि आपका पंचायत इस 289 पंचायतों की सूची में शामिल है या नहीं। अगर आपका पंचायत प्रभावित घोषित किया गया है, तभी आप इस मुआवजे के लिए फॉर्म भर सकेंगे।
कितना मिलेगा फसल नुकसान का पैसा?
किसानों को उनकी खेती और फसल के प्रकार के आधार पर अलग-अलग अनुदान राशि दी जा रही है। आप अधिकतम 2 हेक्टेयर तक की जमीन के नुकसान के लिए फॉर्म भर सकते हैं।
अगर आपका खेत वर्षा आश्रित (असिंचित) क्षेत्र में आता है, तो आपको ₹8,500 प्रति हेक्टेयर के हिसाब से मुआवजा मिलेगा (न्यूनतम ₹1,000 की गारंटी)। अगर खेत सिंचित क्षेत्र में है, तो अनुदान राशि ₹17,000 प्रति हेक्टेयर होगी (न्यूनतम ₹2,000)। वहीं, अगर आपकी फसल शाश्वत या बहुवर्षीय (जैसे गन्ना) है, तो आपको सबसे ज्यादा ₹22,500 प्रति हेक्टेयर का अनुदान दिया जाएगा (न्यूनतम लगभग ₹2,500)।
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रैयत और गैर-रैयत (बटाईदार) के लिए जरूरी नियम
इस योजना की सबसे अच्छी बात यह है कि अपनी जमीन पर खेती करने वाले (रैयत) और दूसरों की जमीन बटाई पर लेकर खेती करने वाले (गैर-रैयत) दोनों ही आवेदन कर सकते हैं।
अगर आप रैयत किसान हैं, तो आपके पास अपनी जमीन का 2023-24, 2024-25 या 2025-26 का लगान रसीद या एलपीसी (LPC) होना चाहिए।
अगर आप गैर-रैयत (बटाईदार) हैं, तो आपको एक स्व-घोषणा पत्र (Swayam Ghoshna Patra) भरना होगा। इस पत्र में मूल भूधारी का नाम, चौहद्दी और 2 आस-पास के किसानों का नाम, पता व सिग्नेचर होना चाहिए। इसके बाद इस पत्र पर पंचायत के वार्ड सदस्य, मुखिया, सरपंच या पंचायत समिति में से किसी एक का हस्ताक्षर और फिर 'कृषि समन्वयक' (Agriculture Coordinator) का वेरिफिकेशन होना अनिवार्य है।
| क्या करें | क्या न करें |
| 25 अक्टूबर रात 10 बजे से पहले आवेदन पूरा कर लें। | अगर आपका पंचायत लिस्ट में नहीं है, तो जबरन फॉर्म न भरें। |
| बटाईदार किसान स्वघोषणा पत्र पर सभी के साइन जरूर कराएं। | पुराने या अमान्य जमीन के रसीद (2022 से पहले के) अपलोड न करें। |
| सही किसान पंजीकरण (Kisan Panjikaran) नंबर का इस्तेमाल करें। | एक ही नुकसान के लिए परिवार के कई लोग अलग-अलग फॉर्म न भरें। |
डीबीटी एग्रीकल्चर पोर्टल पर कैसे करें आवेदन
आवेदन की प्रक्रिया 18 अक्टूबर से शुरू हो चुकी है। आपको डीबीटी एग्रीकल्चर पोर्टल पर 'कृषि इनपुट अनुदान' वाले लिंक पर क्लिक करना है। वहां आपको अपना 13 अंकों का किसान पंजीकरण नंबर दर्ज करना होगा।
अगर आपका पंजीकरण नंबर डालने पर "पंजीकरण संख्या गलत है, निष्क्रिय है या आप प्रभावित पंचायत के नहीं हैं" जैसा एरर आता है, तो इसका मतलब है कि आपका पंचायत इस लिस्ट में शामिल नहीं है और आप फॉर्म नहीं भर सकते। यदि आप पात्र हैं, तो फॉर्म खुलेगा जहां आपको अपनी खेती, नुकसान का रकबा और जरूरी दस्तावेज अपलोड करके फाइनल सबमिट करना होगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
कृषि इनपुट अनुदान योजना क्या है?
यह बिहार सरकार की एक योजना है जिसके तहत प्राकृतिक आपदा (जैसे बाढ़, सूखा) से फसल बर्बाद होने पर किसानों को आर्थिक अनुदान (मुआवजा) दिया जाता है।
आवेदन की आखिरी तारीख क्या है?
कृषि इनपुट अनुदान के लिए ऑनलाइन आवेदन 18 अक्टूबर से शुरू हुए हैं और इसकी अंतिम तिथि 25 अक्टूबर (रात 10 बजे) तक है।
बटाईदार किसानों को मुआवजे के लिए क्या देना होगा?
गैर-रैयत या बटाईदार किसानों को आवेदन के लिए एक स्व-घोषणा पत्र जमा करना होगा, जिस पर अगल-बगल के दो किसानों, पंचायत प्रतिनिधि और कृषि समन्वयक के हस्ताक्षर होने चाहिए।
कितने हेक्टेयर तक के नुकसान का पैसा मिलेगा?
एक किसान परिवार अधिकतम 2 हेक्टेयर तक की फसल के नुकसान के लिए कृषि इनपुट अनुदान का फॉर्म भर सकता है।
आवेदन करते समय "निष्क्रिय या गलत पंचायत" का मैसेज क्यों आ रहा है?
यह मैसेज तब आता है जब आपका गांव या पंचायत सरकार द्वारा जारी की गई 289 प्रभावित पंचायतों की लिस्ट में शामिल नहीं होता है।
सरकारी योजना एवं वित्तीय अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख बिहार कृषि विभाग की अनुदान योजना से जुड़ी रिपोर्ट और डीबीटी पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। अनुदान राशि की स्वीकृति और भुगतान पूरी तरह से सरकारी अधिकारियों के सत्यापन (Verification) पर निर्भर करता है। आधिकारिक लिस्ट और नवीनतम अपडेट के लिए हमेशा डीबीटी एग्रीकल्चर पोर्टल (dbtagriculture.bihar.gov.in) विजिट करें।










