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रात को लाइट जलाकर सोने के नुकसान: 56% लोगों का दिल हो रहा फेल!

रात को लाइट जलाकर सोने के नुकसान को लेकर हाल ही में मेडिकल साइंस की दुनिया से एक ऐसी रिपोर्ट सामने आई है, जिसने आम इंसान से लेकर बड़े-बड़े डॉक्टरों तक को सोचने पर मजबूर कर दिया है। हमारे घरों और आसपास ऐसे बहुत से लोग होते हैं जिन्हें रात को अंधेरे में नींद नहीं आती। कोई रात भर कमरे में जीरो वाट का बल्ब जलाकर सोता है, कोई टीवी चलता हुआ छोड़कर सो जाता है, तो कई लोग अपने सिरहाने मोबाइल फोन को चार्जिंग पर लगाकर छोड़ देते हैं जिसकी लाइट रात भर चमकती रहती है।

अक्सर हम यह सोचते हैं कि जब हमारी आंखें बंद हैं और हम गहरी नींद में हैं, तो कमरे की हल्की सी रोशनी हमारा क्या बिगाड़ लेगी? लेकिन सच यह है कि यह छोटी सी आदत धीरे-धीरे आपके दिल (Heart) को अंदर से कमजोर और बीमार बना रही है। करीब 90 हजार लोगों पर 9 साल तक की गई एक विशाल वैज्ञानिक जांच में पता चला है कि रात को रोशनी में सोने वाले लोगों में 'हार्ट फेलियर' (Heart Failure) का खतरा 56% तक बढ़ जाता है! आइए, बेहद आसान और देसी भाषा में समझते हैं कि रात को लाइट जलाकर सोने के नुकसान क्या हैं, बंद आंखों के बावजूद यह रोशनी दिल तक कैसे पहुंचती है, और घर के बच्चों व बुजुर्गों के लिए सही नियम क्या है।

11,000 लोगों की कलाई पर बंधी घड़ी और दिल के MRI का चौंकाने वाला सच

इस बड़ी मेडिकल खोज की शुरुआत ब्रिटेन के एक स्वास्थ्य सिस्टम से हुई, जहां करीब 5 लाख लोगों की सेहत का पूरा रिकॉर्ड रखा जाता है। वैज्ञानिकों ने साल 2013 से 2015 के बीच इनमें से 11,171 बिल्कुल स्वस्थ लोगों को चुना (जिन्हें पहले से दिल की कोई बीमारी नहीं थी) और उनकी कलाई पर 7 दिनों के लिए एक खास सेंसर वाली घड़ी बांधी। यह घड़ी रात भर इस बात का हिसाब रखती थी कि सोते वक्त उनके कमरे में कितनी रोशनी मौजूद है।

ठीक 3 साल बाद जब इन सभी 11 हजार लोगों के दिल का एमआरआई (Cardiac MRI—जिसमें दिल की हर दीवार और धड़कन साफ दिखती है) किया गया और अमेरिका की एक यूनिवर्सिटी के डॉक्टरों ने इसकी जांच की, तो नतीजे डराने वाले थे:

  • वैज्ञानिकों ने रोशनी नापने के पैमाने पर '3 लक्स' (3 Lux) की एक सीमा पाई। 3 लक्स इतनी हल्की और मद्धम रोशनी होती है जितनी चांदनी रात में होती है, या जब कमरे का दरवाजा बंद हो और नीचे की पतली दरार से बाहर की रोशनी अंदर झांक रही हो।
  • जिन लोगों के कमरे में रात को इस '3 लक्स' से ज्यादा रोशनी रहती थी, उनके दिल का सबसे मुख्य पंप करने वाला हिस्सा भारी हो चुका था, दिल की दीवार मोटी और सख्त (Stiff) पड़ गई थी और उसकी कुदरती लचक खत्म हो रही थी।

'पानी की टंकी' के उदाहरण से समझें कैसे फेल होता है दिल?

आखिर दिल की दीवार मोटी होने से क्या खतरा है? इसे आप अपने घर की छत पर रखी पानी की टंकी के उदाहरण से समझिए। मान लीजिए कि आपकी पानी की टंकी की दीवारें अंदर की तरफ से फूलकर मोटी होती चली जाएं। बाहर से देखने पर तो टंकी उतनी ही बड़ी नजर आएगी, लेकिन दीवार मोटी होने की वजह से उसके अंदर पानी भरने की जगह बहुत कम रह जाएगी!

बिल्कुल यही हाल हमारे दिल का होता है। हमारे दिल में चार कमरे (Chambers) होते हैं, जिनमें से बाईं तरफ का निचला कमरा पूरे शरीर में खून धकेलने का काम करता है। जब रात की रोशनी की वजह से इस कमरे की दीवार मोटी और कड़क हो जाती है, तो उसमें खून ठीक से भर नहीं पाता। डॉक्टरों की नजर में दिल की दीवार का इस तरह मोटा और सख्त होना सीधे तौर पर हार्ट फेलियर (जब दिल शरीर की जरूरत के हिसाब से खून पंप न कर पाए) की सबसे बड़ी निशानी है।

90 हजार लोगों पर 9 साल की जांच: महिलाओं पर सबसे बड़ा खतरा!

दिल की एमआरआई तस्वीरों के बाद, ऑस्ट्रेलिया की एक यूनिवर्सिटी ने इसी डेटाबेस के 88,905 लोगों (जिनकी उम्र 40 से ऊपर और औसत उम्र 62 साल थी) पर एक और बड़ी जांच की। इन लोगों की कलाई पर बंधी घड़ियों ने मिलकर करीब 1 करोड़ 30 लाख घंटे की रात की रोशनी को नापा। इसके बाद लगातार 9 साल तक सरकारी अस्पतालों के रिकॉर्ड में देखा गया कि किन लोगों को दिल की कौन सी बीमारी हुई।

जब घुप अंधेरे में सोने वाले लोगों की तुलना उन लोगों से की गई जिनकी रातें सबसे ज्यादा रोशन थीं, तो रात को लाइट जलाकर सोने के नुकसान के आंकड़े रोंगटे खड़े करने वाले थे:

  1. हार्ट फेलियर का खतरा 56% ज्यादा: आसान शब्दों में कहें तो अगर अंधेरे में सोने वाले 10 लोगों को दिल की बीमारी हुई, तो उतनी ही रोशनी में सोने वाले लोगों में यह संख्या बढ़कर 15 से 16 तक पहुंच गई।
  2. हार्ट अटैक (Heart Attack) का खतरा 50% बढ़ा: रोशनी में सोने वालों में दिल का दौरा पड़ने की आशंका करीब डेढ़ गुना ज्यादा पाई गई।
  3. धड़कन की खराबी और लकवा (Stroke): दिल की धड़कन बेतरतीब चलने (Arrhythmia) का खतरा 33% ज्यादा और ब्रेन स्ट्रोक यानी लकवा मारने का खतरा 25% से अधिक निकला।

खास बात यह है कि वैज्ञानिकों ने इस जांच में शराब, सिगरेट, खान-पान, कसरत, अमीरी-गरीबी और खानदानी बीमारियों के हिसाब-किताब को अलग रखकर देखा था, फिर भी रोशनी का यह सीधा प्रहार साफ नजर आया। सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह रही कि हार्ट फेलियर का यह खतरा पुरुषों के मुकाबले महिलाओं और कम उम्र के युवाओं में कहीं ज्यादा तेज देखा गया।

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जब आंखें बंद होती हैं, तो रोशनी दिल तक कैसे पहुंचती है?

आपके मन में भी यह सवाल जरूर आ रहा होगा कि जब हम सो रहे होते हैं और हमारी आंखें बंद होती हैं, तो फिर एक छोटा सा बल्ब हमारे दिल को नुकसान कैसे पहुंचा सकता है? इसके पीछे दो बड़े वैज्ञानिक कारण हैं:

  • पतली पलकें और बॉडी क्लॉक का कन्फ्यूजन: हमारी आंखों की पलकें बहुत पतली झिल्ली जैसी होती हैं। आंखें बंद होने के बावजूद कमरे की रोशनी का एक हिस्सा पलकों को पार करके अंदर चला जाता है। हमारे दिमाग और दिल समेत शरीर के हर अंग में एक कुदरती घड़ी लगी होती है, जिसे 'बॉडी क्लॉक' (Circadian Rhythm) कहते हैं।
  • रुक जाता है दिल का रिपेयरिंग काम: जैसे ही रात को चारों तरफ अंधेरा होता है, हमारी बॉडी क्लॉक समझ जाती है कि अब सोने का वक्त है। दिमाग नींद लाने वाला हार्मोन (Melatonin) बनाता है, ब्लड प्रेशर नीचे आता है और दिल की धड़कन धीमी हो जाती है ताकि दिन भर काम करने वाले दिल को रात में पूरा आराम मिल सके। लेकिन जब कमरे में लाइट जलती रहती है, तो दिमाग उलझ जाता है कि अभी दिन है या रात, और दिल को आराम देने की प्रक्रिया अधूरी रह जाती है।

'पार्किंग में स्टार्ट छूटी कार' जैसा हो जाता है दिल का हाल!

इस बात को पक्का करने के लिए अमेरिका की प्रसिद्ध नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी (Northwestern University) के वैज्ञानिकों ने अपनी लैब में 20 जवान और तंदुरुस्त लोगों पर एक सीधा प्रयोग किया। पहली रात उन्हें बिल्कुल अंधेरे में सुलाया गया, और अगली रात आधे लोगों को 100 लक्स (100 Lux) की रोशनी में सुलाया गया (इतनी रोशनी जिसमें कमरे में चल-फिर सकें, पर किताब पढ़ना मुश्किल हो)।

नतीजा यह निकला कि लाइट वाली रात में सोते समय भी उन नौजवानों के दिल की धड़कन बढ़ी रही और उनका शरीर अंदर से चौकन्ना (Alert Mode) रहा। इसे ऐसे समझिए कि अगर आप रात भर अपनी गाड़ी को पार्किंग में बंद करके खड़ा कर दें, तो इंजन ठंडा होकर आराम करता है। लेकिन अगर आप पार्किंग में खड़ी गाड़ी का इंजन रात भर स्टार्ट छोड़ दें, तो गाड़ी कहीं चलेगी तो नहीं, लेकिन सुबह तक उसका इंजन अंदर ही अंदर घिस जाएगा! रात की रोशनी हमारे दिल के इंजन के साथ ठीक यही करती है।

सिर्फ एक रात की रोशनी से 'डायबिटीज' (शुगर) की शुरुआत!

अमेरिका की उसी लैब टेस्ट में एक और बेहद डरावना सच सामने आया। जिन स्वस्थ नौजवानों को सिर्फ एक रात लाइट जलाकर सुलाया गया था, जब अगली सुबह उन्हें जांच के लिए मीठा घोल (Glucose) पिलाया गया, तो उनके शरीर को उस मीठे को पचाने में भारी मशक्कत करनी पड़ी। उनके शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस देखा गया—यानी सिर्फ एक रात की रोशनी से शरीर में वह गड़बड़ी शुरू हो गई जो आगे चलकर इंसान को डायबिटीज (Sugar) का मरीज बना देती है!

(स्पष्टीकरण: डॉक्टर यह भी मानते हैं कि बड़ी आबादी वाली जांचों में कुछ अन्य कारण भी जुड़े हो सकते हैं—जैसे हो सकता है जो लोग लाइट जलाकर सोते हों, वे देर रात तक जागते हों, नाइट शिफ्ट में काम करते हों या किसी मानसिक तनाव में हों। लेकिन फिर भी इतने बड़े आंकड़े साफ इशारा करते हैं कि रात की रोशनी को हल्के में लेना बड़ी भूल है। वहीं, जिन लोगों को दिन के समय अच्छी धूप और रोशनी मिली, उनमें दिल की बीमारी का खतरा कम पाया गया। यानी दुश्मन रोशनी नहीं, बल्कि 'गलत समय की रोशनी' है!)

बचाव के 5 उपाय: घर में बच्चे और बुजुर्ग हों तो क्या करें?

आंकड़े बताते हैं कि आज हर 10 में से 4 लोग रात को टीवी, बल्ब या मोबाइल की रोशनी के साथ सोते हैं। अगर आप रात को लाइट जलाकर सोने के नुकसान से अपने परिवार को बचाना चाहते हैं, तो आज से ही इन 5 आसान नियमों को अपनाएं:

  1. बुजुर्गों और बच्चों के लिए 'पीली या लाल लाइट' का नियम: अब सबसे बड़ा व्यावहारिक सवाल यह है कि अगर घर के बुजुर्ग रात को उठकर बाथरूम जाते हैं, तो क्या उन्हें घुप अंधेरे में छोड़ दें? बिल्कुल नहीं! अंधेरे में बुजुर्गों के फिसलने या ठोकर लगकर गिरने का खतरा रहता है। इसका सही समाधान यह है कि छत या दीवार पर लगा तेज सफेद या नीला बल्ब बंद कर दें। इसकी जगह फर्श के पास (जमीन के लेवल पर) एक बहुत हल्की पीली, नारंगी या लाल रंग की छोटी लाइट (Foot Light) लगाएं। लाल या नारंगी रोशनी बॉडी क्लॉक को खराब नहीं करती और यह रोशनी सिर्फ पैरों के रास्ते तक रहती है, सोते हुए इंसान की आंखों तक नहीं पहुंचती।
  2. टीवी में लगाएं 'स्लीप टाइमर': अगर आपको रात में टीवी देखते-देखते सोने की आदत है, तो रिमोट से उसमें 30 या 45 मिनट का 'स्लीप टाइमर' (Sleep Timer) सेट कर दें, ताकि आपके सोते ही टीवी अपने आप बंद हो जाए।
  3. मोबाइल को सिरहाने से हटाएं: सोते समय मोबाइल फोन को अपने तकिए के पास या बिस्तर पर चार्जिंग में लगाकर न छोड़ें। नोटिफिकेशन लाइट और स्क्रीन की चमक आपकी नींद की गहराई को नष्ट करती है।
  4. मोटे पर्दे और आई-मास्क (Eye Mask): भारत के शहरों में खिड़की के बाहर जलने वाली स्ट्रीट लाइट या सामने की दुकानों के चमकते बोर्ड कमरे में उजाला कर देते हैं। इससे बचने के लिए खिड़कियों पर गहरे रंग के मोटे पर्दे (Blackout Curtains) लगाएं। अगर रोशनी रोकना संभव न हो, तो आंखों पर सूती पट्टी (Sleep Eye Mask) बांधकर सोएं।
  5. सुबह की धूप जरूर लें: हमारे दादा-दादी बिना किसी वैज्ञानिक रिसर्च के भी रात को लालटेन बुझाकर सोते थे और सुबह सूरज निकलते ही जाग जाते थे। अपनी बॉडी क्लॉक को सही रखने के लिए सुबह उठकर 15-20 मिनट सूरज की प्राकृतिक रोशनी में जरूर बिताएं।

याद रखिए, दिन का उजाला आपके शरीर को ऊर्जा देने के लिए है और रात का गहरा अंधेरा आपके दिल की मरम्मत और आराम के लिए है। आज ही अपने बेडरूम की लाइट ऑफ करें और अपने दिल को एक लंबी व स्वस्थ उम्र का तोहफा दें!

(HealthBook)

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