दूर से डेयरी फार्मिंग का व्यवसाय बहुत आकर्षक लगता है। गायों के बीच रहना और रोज दूध बिकते हुए देखना हर किसी को लुभाता है। लोगों को लगता है कि आज गाय खरीदी और कल से पैसा आना शुरू हो जाएगा। लेकिन इस व्यवसाय की जमीनी हकीकत कुछ और ही है। बिहार के आरा से 12 किलोमीटर दूर दुल्हनगंज में पिछले सात सालों से डेयरी चला रहे शंभू शरण सिंह की कहानी आपको इस व्यवसाय का एक अलग और बेहद प्रैक्टिकल पहलू दिखाएगी।
5 मुख्य बातें
शंभू सिंह अपने फार्म पर किसी भी गाय को बांधकर नहीं रखते हैं।
मिल्किंग और ड्राई गायों के लिए फार्म में अलग-अलग जोन बनाए गए हैं।
गायों को हमेशा सूखा चारा और 15 दिन का एडवांस बना हुआ दाना दिया जाता है।
बछियों को बीमारियों से बचाने के लिए जालीदार पिंजरे में रखकर बोतल से दूध पिलाया जाता है।
डेयरी में दूध बेचने से ज्यादा अच्छी नस्ल की बछियां तैयार करने पर जोर दिया जाता है।
बिना बांधे गाय पालने का फ्री रेंज मॉडल
शंभू सिंह के पास करीब चार बीघे का प्लॉट है जिसमें 50 से ज्यादा पशु हैं। इनमें 19 गायें दूध दे रही हैं जिनसे रोजाना 250 लीटर से ज्यादा दूध का उत्पादन होता है और 30 से 32 बछियां हैं। उनके फार्म की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वहां कोई भी गाय या बछिया बंधी हुई नहीं रहती है। सभी पशु पूरी तरह से खुले रहते हैं। उन्होंने अपने फार्म को अलग-अलग जोन में बांटा है। दूध देने वाली गायों का जोन अलग है, दूध देना बंद कर चुकी ड्राई गायों का जोन अलग है और प्रेग्नेंट गायों व बछियों का जोन अलग रखा गया है।
सूखा चारा और 15 दिन का एडवांस दाना
आमतौर पर कई किसान गायों को दाना फुलाकर या पानी में सानकर खिलाते हैं। लेकिन इस फार्म पर गायों को पूरी तरह से सूखा चारा और सूखा दाना दिया जाता है। शंभू सिंह बताते हैं कि 15 दिन का दाना एक बार में ही पीसकर तैयार कर लिया जाता है। इस दाने में मक्का, जौ, सरसों और बिनौला की खली, चोकर, चुन्नी, मिनरल मिक्सचर, नमक और सोडा मिलाया जाता है। आधा दाना वह खुद तैयार करते हैं और आधा किसी अच्छी कंपनी का इस्तेमाल करते हैं। सूखा दाना देने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि अगर गाय दाना छोड़ भी दे तो वह सड़ता नहीं है और फार्म पर मक्खी या कीड़े नहीं लगते।
बछिया पालन और गोबर प्रबंधन का खास तरीका
बछियों को मिट्टी खाने और बीमारियों से बचाने के लिए शुरुआत के तीन महीने तक जालीदार पिंजरे में रखा जाता है और उन्हें गाय के थन से नहीं बल्कि बोतल से नापकर दूध पिलाया जाता है। इसके अलावा फार्म पर गायों का गोबर जमीन से नहीं हटाया जाता है। गोबर पड़ा रहने से वह स्पंजी हो जाता है जिस पर गायों को बैठने में आराम मिलता है। यह सर्दियों में गर्म और गर्मियों में ठंडा रहता है। कीड़े-मकोड़ों को साफ करने के लिए फार्म में देसी मुर्गे-मुर्गियां खुले छोड़ दिए गए हैं।
बिहार में डेयरी फार्मिंग की चुनौतियां
शंभू सिंह मानते हैं कि यह बहुत चैलेंजिंग बिजनेस है। बिहार में पंजाब जैसी सुविधाएं नहीं हैं। अच्छे और सर्टिफाइड वेटनरी डॉक्टरों की कमी है। इसके अलावा मक्के का रेट 24 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है जबकि दूध 55 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। ऐसे में मिलावटी और सस्ते दूध से मुकाबला करना बहुत मुश्किल होता है। उनका कहना है कि अगर आप डेयरी शुरू करना चाहते हैं तो सारा फोकस अच्छी ब्रीड तैयार करने पर लगाएं क्योंकि केवल दूध बेचकर मुनाफा कमाना आसान काम नहीं है।
| डेयरी फार्मिंग के नियम | क्या बिल्कुल न करें |
| गायों को खुला और तनावमुक्त वातावरण दें | ज्यादा दूध के लालच में गाय को बहुत मोटी न करें |
| गाय के पैरों की ऊंचाई के बराबर नीची नाद बनाएं | दाना पानी में सानकर न दें क्योंकि बचने पर वह सड़ जाता है |
| अपनी क्षमता के अनुसार ही गाय खरीदें | बिना सही कैलकुलेशन के बड़े स्तर पर शुरुआत न करें |
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
फ्री रेंज डेयरी फार्मिंग क्या है?
फ्री रेंज डेयरी फार्मिंग में गायों को खूंटे से बांधने के बजाय एक बड़े और सुरक्षित बाड़े में खुला छोड़ दिया जाता है जिससे वे तनावमुक्त रहती हैं।
गायों को सूखा दाना खिलाने के क्या फायदे हैं?
सूखा दाना खिलाने से गाय पानी ज्यादा पीती है, उसका पाचन ठीक रहता है और दाना नाद में बचने पर सड़ता नहीं है जिससे मक्खियां नहीं आतीं।
बछियों को बोतल से दूध क्यों पिलाना चाहिए?
बोतल से दूध पिलाने से यह पता रहता है कि बछिया ने कितना दूध पिया है और बीमार या नई बछियों को आसानी से कोलेस्ट्रम (खीस) दिया जा सकता है।
डेयरी फार्म में गोबर न हटाने का क्या फायदा है?
गोबर सूखने पर गद्देदार हो जाता है जो गायों के जोड़ों के लिए आरामदायक होता है और यह मौसम के अनुसार तापमान भी नियंत्रित करता है।
डेयरी व्यवसाय में सबसे ज्यादा नुकसान कब होता है?
बिना सही ट्रेनिंग, महंगी फीडिंग और दूध का उचित बाजार मूल्य न मिलने पर डेयरी व्यवसाय में सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ता है।
व्यावसायिक एवं चिकित्सीय अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख एक अनुभवी डेयरी किसान के व्यक्तिगत अनुभवों और बातचीत पर आधारित है। पशुपालन और डेयरी व्यवसाय में वित्तीय जोखिम शामिल होते हैं। जानवरों की डाइट, शेड प्रबंधन या किसी भी बीमारी के इलाज के लिए हमेशा किसी प्रमाणित पशु चिकित्सक (Veterinarian) की सलाह लें।










