Lord Vishwakarma (भगवान विश्वकर्मा) सनातन धर्म के एक ऐसे प्रमुख देवता हैं, जिन्हें पूरी दुनिया का सबसे पहला आर्किटेक्ट (Architect), इंजीनियर और सभी देवी-देवताओं का वेपन डिजाइनर (Weapon Designer) माना जाता है। आज हम जिस आधुनिक इंजीनियरिंग और वास्तुकला (Architecture) को देखते हैं, उसकी नींव हजारों-लाखों साल पहले ही रखी जा चुकी थी। आम मनुष्यों की तरह हमारे देवी-देवता भी महलों और भव्य भवनों में रहा करते थे। ऊंचे-ऊंचे कक्ष, आसमान में उड़ने वाले पुष्पक विमान, युद्ध में विजय दिलाने वाले शक्तिशाली रथ और अचूक अस्त्र-शस्त्र—इन सबका निर्माण आखिर कौन करता था?
इन सभी अद्भुत रचनाओं के पीछे केवल एक ही शक्ति थी, और वह थे ब्रह्मांड के प्रथम शिल्पकार Lord Vishwakarma। आपको जानकर हैरानी होगी कि सिर्फ सनातन धर्म ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई अन्य प्राचीन धर्मों और सभ्यताओं में भी इन्हें एक महान निर्माता और देवता के रूप में पूजा जाता है। आइए जानते हैं इनकी उत्पत्ति और इनके द्वारा किए गए उन महान निर्माणों की अनकही कहानी, जो आज के आधुनिक विज्ञान को भी सोचने पर मजबूर कर देती है।
भगवान विश्वकर्मा का जन्म और पौराणिक परिचय
स्कंद पुराण और अन्य प्राचीन ग्रंथों में Lord Vishwakarma के जन्म और उनके परिचय का विस्तार से वर्णन मिलता है। स्कंद पुराण के श्लोकों के अनुसार, महर्षि अंगिरा के ज्येष्ठ पुत्र बृहस्पति की बहन भवना 'ब्रह्म विद्या' की बहुत बड़ी जानकार थीं। उनका विवाह आठवें वसु 'महर्षि प्रभास' के साथ संपन्न हुआ था। इन्हीं दोनों की महान संतान के रूप में भगवान विश्वकर्मा जी का जन्म हुआ था।
कई अन्य पौराणिक कथाओं में इन्हें स्वयं ब्रह्मा जी की 'मानस संतान' भी कहा गया है। हिंदू धर्म में इन्हें सभी देवताओं के इष्ट देव, शिल्पकार और वास्तु रचनाकार के रूप में पूजा जाता है। यही कारण है कि आज भी भारत में हर कारखाने, निर्माण स्थल और तकनीकी कार्य से जुड़े लोग 'विश्वकर्मा पूजा' के दिन इनकी विशेष आराधना करते हैं।
चार युगों के 4 सबसे महान और रहस्यमयी निर्माण
अगर आप सोच रहे हैं कि आखिर Lord Vishwakarma ने ऐसा क्या-क्या बनाया था जिसके कारण उन्हें फर्स्ट आर्किटेक्ट कहा जाता है, तो आपको हमारे चार युगों का इतिहास देखना होगा। उन्होंने हर युग में अपनी वैज्ञानिक समझ की एक अद्भुत मिसाल पेश की थी:
- सतयुग का स्वर्ग लोक: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सतयुग में देवताओं के रहने के लिए जिस भव्य 'स्वर्ग लोक' का निर्माण किया गया था, वह पूरी तरह से विश्वकर्मा जी के दिशा-निर्देशों पर ही बना था।
- त्रेता युग की सोने की लंका: रावण की वह खूबसूरत सोने की लंका, जो अपनी वास्तुकला के लिए पूरे ब्रह्मांड में प्रसिद्ध थी, उसे भी भगवान विश्वकर्मा ने ही डिजाइन किया था।
- द्वापर युग की द्वारका नगरी: भगवान श्री कृष्ण की जलमग्न हो चुकी द्वारका नगरी का निर्माण भी Lord Vishwakarma ने ही किया था। वास्तु शास्त्र के अनुसार बनी इस नगरी की लंबाई और चौड़ाई दोनों ही 48 कोस की थी। इस नगरी में भवन, सड़कें, गलियां और चौराहों का एक परफेक्ट ग्रिड सिस्टम बनाया गया था।
- कलयुग का इंद्रप्रस्थ: कलयुग के आरंभ से लगभग 5000 वर्ष पूर्व, पांडवों की नगरी 'इंद्रप्रस्थ' (जो आज की दिल्ली है) का निर्माण भी इन्हीं के द्वारा किया गया था, जिसमें मौजूद मायावी महल ने दुर्योधन को भी भ्रम में डाल दिया था।
पुष्पक विमान, राम सेतु और अस्त्र-शस्त्रों के रचयिता
रामायण काल में जब रावण माता सीता का हरण कर उन्हें पुष्पक विमान में बैठाकर लंका ले जा रहा था, तो आपको बता दें कि वह 'पुष्पक विमान' भी खुद Lord Vishwakarma द्वारा ही बनाया गया था। यह विमान आज के किसी भी आधुनिक हवाई जहाज से ज्यादा एडवांस था, क्योंकि यह वाहन चलाने वाले के मन (Mind-controlled) से खुद नियंत्रित होता था।
समुद्र पार करने के लिए जिस ऐतिहासिक 'रामसेतु' का निर्माण नल और नील नामक वानरों ने किया था, वे दोनों खुद भगवान विश्वकर्मा जी के ही पुत्र थे और उन्होंने यह अद्भुत इंजीनियरिंग विद्या अपने पिता से ही सीखी थी। इसके अलावा, जिस रथ पर बैठकर भगवान शिव (महादेव) ने त्रिपुरासुर (वधुन माली, तारकाश और कमलाक्ष) का वध किया था, उस अजेय रथ का निर्माण करने वाले भी स्वयं विश्वकर्मा जी ही थे।
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सुमेरियन, इजिप्ट और इंका सभ्यता से रहस्यमयी कनेक्शन
Lord Vishwakarma का अस्तित्व केवल भारतीय उपमहाद्वीप या सनातन धर्म तक सीमित नहीं है। इंका सभ्यता (Inca), माया सभ्यता (Maya), इजिप्शियन (Egyptian) और सुमेरियन (Sumerian) सभ्यताओं में भी कई ऐसे ठोस सबूत मिले हैं, जो यह मानने पर मजबूर करते हैं कि दुनिया के पहले आर्किटेक्ट यही थे।
- चक्रेश्वर मंदिर की मूर्ति: महाराष्ट्र में मौजूद चक्रेश्वर मंदिर में भगवान विश्वकर्मा जी की एक प्राचीन मूर्ति है, जिसके एक हाथ में कोई 'मशीनी उपकरण' (Machine Tool) या 'रोड सर्वे इक्विपमेंट' (Road Survey Equipment) जैसी चीज साफ दिखाई देती है।
- सुमेरियन सभ्यता के अनुनाकी: सुमेरियन सभ्यता के लोग मानते हैं कि 'अनुनाकी' (Anunnaki) नाम के देवता धरती पर उतरे थे जिन्होंने भव्य नगर बनाए। कई शोधकर्ता मानते हैं कि यह अनुनाकी कोई और नहीं बल्कि विश्वकर्मा जी ही थे।
- माचू पीचू और पिरामिड का रहस्य: साउथ अमेरिका के पेरू में स्थित माचू पीचू (Machu Picchu) हो या इजिप्ट के महान पिरामिड्स, इन सभी का निर्माण 'ओरियन तारामंडल' (Orion Constellation) के सटीक अलाइनमेंट के अनुसार किया गया है। भारत, चीन, इजिप्ट, ग्रीस और मेक्सिको में मौजूद प्राचीन हेलीपैड्स और भव्य शहर इसी उन्नत तकनीक (Advanced Technology) से बने हैं, जो आज के समय में भी एक रहस्य है।
- इजिप्ट में सनातन की झलक: इजिप्ट में खोज के दौरान मिले अवशेषों और दीवारों पर बनी नक्काशियों में नंदी, भगवान शिव, सूर्य और विश्वकर्मा जी की पूजा के स्पष्ट संकेत मिलते हैं।
आज के आधुनिक विज्ञान के पास भी उन प्राचीन तकनीकों का कोई जवाब नहीं है जिनका उपयोग हजारों साल पहले Lord Vishwakarma ने किया था। एक वेपन डिजाइनर से लेकर दुनिया के पहले सिविल इंजीनियर तक, उनकी महानता अनंत है। क्या आप भी मानते हैं कि प्राचीन भारत की वास्तुकला आज की तकनीक से ज्यादा उन्नत थी? अपने विचार हमें जरूर बताएं!
(Mysterious Hindu)
