कल्पना कीजिए कि आपने हिंदुस्तान का सबसे महंगा फोन खरीदा है जिसकी कीमत ₹3 लाख है। कवर और इंश्योरेंस मिलाकर यह कीमत ₹4 लाख तक पहुंच जाती है। आप इसे बड़े प्यार से घर लाते हैं, लेकिन बिना गिरे और बिना कोई चोट लगे ही फोन बीच से टूट जाता है! Apple के पहले फोल्ड होने वाले फोन 'आईफोन डओ' (iPhone Duo) के साथ कुछ ऐसा ही हो रहा है। 23 अक्टूबर को बिकना शुरू हुए इस फोन को लेकर इंटरनेट पर बवाल मचा हुआ है। यूजर्स फोन की बीच से टूटी हुई स्क्रीन की तस्वीरें शेयर कर रहे हैं, जिसे इंटरनेट ने 'क्रैक गेट' (Crack Gate) का नाम दिया है। आइए पत्रकार शुभांकर मिश्रा की रिपोर्ट के आधार पर समझते हैं कि आईफोन डओ क्रैक गेट (iPhone Duo Crack Gate) आखिर क्या है और Apple से इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई।
5 मुख्य बातें
- आईफोन डओ की कीमत भारत में लगभग 3 से 4 लाख रुपये (कवर और इंश्योरेंस सहित) है।
- बिना फोन को गिराए, सिर्फ खोलने-बंद करने पर फोन बीच से (हिंज से) क्रैक हो रहा है।
- इंटरनेट पर इस स्क्रीन टूटने वाले विवाद को 'क्रैक गेट' नाम दिया गया है।
- आईफिक्सिट (iFixit) के अंदाजे के मुताबिक, फोन के अंदर कार्बन फाइबर की पट्टी हिलने से स्क्रीन पर दबाव पड़ रहा है।
- Apple ने 26 अक्टूबर को खराबी की बात मानी है और प्रभावित यूजर्स को फोन बदलने का ऑफर दिया है।
6 घंटे में टूट गया 4 लाख का फोन!
यह कोई सुनी-सुनाई बात नहीं है, बल्कि दुनिया भर से यूजर्स अपना दर्द बयां कर रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया के एक आदमी ने 'रेडिट' (Reddit) पर बताया कि फोन उसके पास सिर्फ 6 घंटे रहा। उसने इसे 20 बार भी नहीं खोला होगा। अचानक फोन खोलते वक्त हिंज (जोड़) के पास कुछ महसूस हुआ, 'कट-कट-कट' की आवाज आई और स्क्रीन बीच से टूट गई, जबकि फोन पर बाहर कोई खरोंच तक नहीं थी।
अमेरिका के एक और यूजर का कहना है कि फोन सेटअप करते समय, सिर्फ चार बार खोलने पर ही उसकी स्क्रीन चटक गई। ज्यादातर तस्वीरें दिखा रही हैं कि यह टूट बिल्कुल बीच की लाइन (Hinge) पर आ रही है। इसे ऐसे समझिए जैसे आप कोई नई किताब पहली बार खोलें और उसका कवर बीच से ही फट जाए।
हिंज (Hinge) में आखिर क्या है गड़बड़?
जब स्क्रीन सिर्फ एक ही जगह (बीच) से टूट रही है, तो सबसे पहला शक फोन के जोड़ यानी 'हिंज' पर जाता है। Apple का कहना है कि इस हिंज में 100 से ज्यादा पुर्जे इस्तेमाल हुए हैं। स्क्रीन के नीचे टाइटेनियम और कार्बन फाइबर की पट्टियां दी गई हैं, जो बीच के हिस्से को सहारा देती हैं।
गैजेट्स के अंदरूनी हिस्से की जांच करने वाली वेबसाइट 'आईफिक्सिट' (iFixit) ने एक बड़ा अंदाजा लगाया है। उनके मुताबिक, फोन के अंदर बीच की एक पट्टी शायद अपनी जगह से थोड़ा हिल जाती है और सीधा स्क्रीन पर दबाव बनाती है। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे दरवाजे का एक कब्ज़ा (Hinge) अटक जाए, तो पूरा दरवाजा नहीं टूटता, बल्कि कब्जे के पास की लकड़ी चटक जाती है। हालांकि, Apple ने अभी तक तकनीकी रूप से यह साफ नहीं किया है कि असली खराबी क्या है।
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क्या यह सिर्फ कुछ फोन्स की दिक्कत है या पूरे डिजाइन की?
Apple ने 26 अक्टूबर को यह माना है कि उसे कुछ आईफोन डओ की अंदर वाली स्क्रीन में दिक्कत की जानकारी मिली है। कंपनी का कहना है कि प्रभावित लोग 'Apple Care' से अपना फोन बदलवा सकते हैं। यानी कंपनी खराबी तो मान रही है, लेकिन इसे सिर्फ "कुछ फोन" की दिक्कत बता रही है।
असली सवाल यह है कि यह 'मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट' है या 'डिजाइन डिफेक्ट'? अगर फोन बनाते वक्त कुछ चूक हुई है (यानी एक डब्बे में कुछ बल्ब खराब निकल गए), तो कंपनी फोन बदलकर मामला संभाल लेगी। लेकिन अगर पूरा डिजाइन ही गलत है (यानी होल्डर का नक्शा ही गलत है), तो आज नहीं तो कल हर फोन की स्क्रीन टूटेगी। यही डर उन ग्राहकों के मन में है जिन्होंने 4 लाख रुपये खर्च किए हैं।
आईफोन डओ की अन्य बड़ी कमियां
भारत में वैसे ही यह फोन आसानी से नहीं मिल रहा है। लेकिन जिन्होंने इसे खरीदा है, उन्होंने क्रैक गेट के अलावा भी 10 बड़ी कमियां बताई हैं।
- फोन में सिर्फ एक चिप है।
- इतने महंगे फोन में कैमरा क्वालिटी बहुत हाई नहीं है।
- फोन जल्दी गर्म (Heat) हो जाता है।
- स्क्रीन के बीच में लकीर (Crease) साफ दिखाई देती है।
- इसका इंश्योरेंस बहुत महंगा है और सिर्फ कवर ही 15,000 रुपये का आता है।
- यह लेफ्ट हैंड यूजर्स के मुकाबले राइट हैंड यूजर्स के लिए ज्यादा फ्रेंडली है।
- इसमें अभी भी इन-स्क्रीन लॉक सिस्टम नहीं है, साइड बटन दबाना पड़ता है।
क्या Samsung और चाइनीज कंपनियों के सालों बाद मार्केट में उतरने के बावजूद Apple ने जल्दबाजी कर दी है? क्या लोगों का Apple पर जो अटूट भरोसा था, वह इस 'क्रैक गेट' से टूट रहा है? अगर आप भी इस फोन को लेने का मन बना रहे हैं, तो फिलहाल थोड़ा इंतजार करना ही समझदारी होगी।
| भ्रम (Myths) | सच्चाई (Facts) |
| आईफोन डओ यूजर्स के हाथ से गिरने की वजह से टूट रहा है। | नहीं, बिना गिरे सिर्फ फोन खोलने (अनफोल्ड करने) पर स्क्रीन बीच से टूट रही है। |
| फोन की स्क्रीन किनारे या ऊपर-नीचे से क्रैक हो रही है। | ज्यादातर मामलों में स्क्रीन बिल्कुल बीच से, यानी हिंज (जोड़) के पास से टूट रही है। |
| Apple ने इस खराबी को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया है। | Apple ने 26 अक्टूबर को खराबी मानी है और Apple Care के जरिए फोन बदलने का ऑफर दिया है। |
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q. आईफोन डओ (iPhone Duo) की भारत में कीमत कितनी है?
Ans. इसकी बेस कीमत लगभग 3 लाख रुपये है, जो महंगे कवर (15 हजार) और इंश्योरेंस के साथ 4 लाख रुपये तक पहुंच जाती है।
Q. क्रैक गेट (Crack Gate) क्या है?
Ans. Apple के नए फोल्डेबल फोन की स्क्रीन बिना गिरे बीच हिंज से अपने आप टूट रही है, इंटरनेट पर इसी विवाद को 'क्रैक गेट' कहा जा रहा है।
Q. फोन की स्क्रीन बीच से क्यों टूट रही है?
Ans. आईफिक्सिट के अनुसार, हिंज के अंदर मौजूद कार्बन फाइबर की पट्टी हिलने से स्क्रीन पर दबाव पड़ रहा है, जिससे वह चटक रही है।
Q. क्या Apple टूटे हुए फोन बदल रहा है?
Ans. जी हां, Apple ने खराबी की बात मानी है और प्रभावित यूजर्स Apple Care के माध्यम से अपना डिवाइस रिप्लेस करवा सकते हैं।
Q. क्या इस महंगे फोन का कैमरा बहुत शानदार है?
Ans. यूजर्स के रिव्यू के मुताबिक, 3-4 लाख रुपये की कीमत होने के बावजूद इसका कैमरा बहुत हाई-क्वालिटी का नहीं है।
तकनीकी/वित्तीय अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख मीडिया रिपोर्ट्स में दी गई सामान्य जानकारी पर आधारित है। फोन की कीमतें, वारंटी नियम और रिप्लेसमेंट पॉलिसी Apple के आधिकारिक दिशानिर्देशों के अनुसार बदल सकती हैं। इतना महंगा गैजेट खरीदने से पहले कंपनी की आधिकारिक रिप्लेसमेंट पॉलिसी और ताजा रिव्यू जरूर जांच लें।









