कड़कड़ाती ठंड की सुबह जब हम गर्म रजाई से निकलकर सीधे ठंडी हवा में जाते हैं, तो शरीर अंदर ही अंदर एक बड़े खतरे से लड़ रहा होता है। अक्सर सर्दियों में हार्ट अटैक (Winter heart attack) और जोड़ों के दर्द के मामले अचानक बढ़ जाते हैं। कई लोगों को लगता है कि यह सिर्फ बुजुर्गों का वहम है, लेकिन एक्सपर्ट्स के मुताबिक सर्दी में दिल की बीमारियों से जाने वाला खतरा गर्मी के मुकाबले 30% ज्यादा होता है। आखिर ऐसा क्या होता है कि वही शरीर और वही उम्र ठंड आते ही खतरे में आ जाती है? आइए पत्रकार शुभांकर मिश्रा की रिपोर्ट के आधार पर समझते हैं कि ठंड हमारे दिल, नसों और जोड़ों के साथ क्या खेल खेलती है।
5 मुख्य बातें
- सर्दी में शरीर की गर्मी बचाने के लिए नसें सिकुड़ जाती हैं, जिससे बीपी (BP) बढ़ जाता है।
- ठंड में खून को थक्का (Clot) बनाने वाले कण ज्यादा चिपकते हैं, जो हार्ट अटैक का कारण बनते हैं।
- जोड़ों का तरल पदार्थ (लुब्रिकेंट) ठंड में गाढ़ा हो जाता है, जिससे घुटनों में अकड़न आती है।
- दर्द की गोलियां ज्यादा खाने से हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा 40% तक बढ़ सकता है।
- अचानक ठंडे पानी से नहाना या अंधेरे (भोर) में ठंडी हवा में सैर करना दिल पर भारी पड़ सकता है।
सर्दियों में नसों और दिल का कनेक्शन
ठंड लगते ही हमारा शरीर सबसे पहले अपनी गर्मी बचाने के काम में लग जाता है। इसके लिए वह हाथ, पैर और चमड़ी की नसों को सिकोड़ (तंग कर) देता है। इसे ऐसे समझिए जैसे बगीचे के पानी वाले पाइप को बीच से दबा दिया जाए, तो पानी का रास्ता तंग हो जाता है।
रास्ता तंग होने पर पानी फेंकने वाली मोटर (यानी दिल) को ज्यादा जोर लगाना पड़ता है। नसों के सिकुड़ने से ब्लड प्रेशर (BP) सच में ऊंचा हो जाता है। ऐसे में दिल पर जोर बढ़ता है, लेकिन उसी वक्त उसे मिलने वाला खून घट जाता है। जो लोग पहले से बीपी, शुगर या कोलेस्ट्रॉल (खून की चर्बी) के मरीज हैं, उनके लिए यह मौसम बहुत भारी माना जाता है।
खून का थक्का और हार्ट अटैक का असली कारण
सिर्फ नसें सिकुड़ने से हार्ट अटैक नहीं आता। अटैक तब होता है जब दिल को खून पहुंचाने वाली नस में खून का थक्का (Clot) फंसकर रास्ता बंद कर देता है।
सर्दियों में खून के वो कण जो थक्का बनाते हैं, वो आपस में ज्यादा चिपकने लगते हैं। अगर आपकी नसों में पहले से चर्बी जमी है (जैसे नाली में आधा कचरा जमा हो) और ऊपर से नस सिकुड़ जाए, तो उसमें एक क्लॉट फंसते ही खून का प्रवाह पूरी तरह रुक सकता है। यही स्थिति 40 की उम्र के बाद बिना बताए हार्ट अटैक ला सकती है।
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जोड़ों का दर्द और गठिया का सच
उत्तर भारत की सर्दियों में लगभग हर घर में बुजुर्ग घुटने दर्द की शिकायत करते हैं। कुछ डॉक्टर्स मानते हैं कि जोड़ों के बीच का चिकना तरल पदार्थ, जो मशीन में तेल (लुब्रिकेंट) का काम करता है, वो ठंड में गाढ़ा हो जाता है। इसी को लोग 'जोड़ जाम होना' कहते हैं।
ठंड सीधे तौर पर गठिया (Arthritis) पैदा नहीं करती, लेकिन अगर आपको पहले से जोड़ों की दिक्कत है, तो यह दर्द और अकड़न को बढ़ा सकती है। ठंड के कारण जोड़ के आसपास की मांसपेशियां भी कस जाती हैं, जिससे शरीर दर्द को ज्यादा महसूस करता है।
पेनकिलर का दिल पर खतरनाक असर
घुटने या जोड़ों के दर्द से बचने के लिए कई लोग रोज दर्द की गोलियां (Painkillers) खाने लगते हैं। यह आदत आपके दिल के लिए जानलेवा साबित हो सकती है।
सूजन और दर्द की कुछ गोलियों की बड़ी खुराक रोज लेने से हार्ट अटैक या लकवे (Stroke) का खतरा 40% तक बढ़ जाता है। ये गोलियां बीपी बढ़ा सकती हैं और शरीर में पानी रोक देती हैं। इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के खुद से गोलियां खाते रहना सुरक्षित नहीं है।
सर्दियों में क्या सावधानियां बरतें?
जागने के कुछ घंटों बाद तक बीपी वैसे ही हाई रहता है और उन्हीं घंटों में हार्ट अटैक सबसे ज्यादा आते हैं। इसलिए सुबह उठते ही रजाई से निकलकर तुरंत ठंडी हवा या अंधेरे में सैर पर ना जाएं। नहाते समय अचानक से ठंडा पानी शरीर पर ना डालें।
सैर हमेशा सूरज निकलने के बाद करें। घर से बाहर (गर्म कमरे से) निकलने से पहले थोड़ा हाथ-पैर चलाकर शरीर को गर्म (Warm-up) कर लें। एक मोटे कपड़े के बजाय कई परतों (Layers) में कपड़े पहनें और सिर ढककर निकलें। अगर सीने में तेज दर्द, भारीपन हो, सांसें फूलें या ठंडा पसीना आए, तो इंतजार ना करें, तुरंत अस्पताल पहुंचें।
| भ्रम (Myths) | सच्चाई (Facts) |
| सर्दियों में जोड़ों का दर्द सिर्फ बुजुर्गों का वहम है। | यह सच में होता है। ठंड में जोड़ों का तरल पदार्थ गाढ़ा हो जाता है और मांसपेशियां कस जाती हैं। |
| दर्द की गोलियां (Painkillers) घुटने दर्द के लिए पूरी तरह सुरक्षित हैं। | बिना डॉक्टर की सलाह के इन्हें रोज खाने से हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा 40% तक बढ़ सकता है। |
| सर्दी-खांसी और फ्लू का दिल से कोई लेना-देना नहीं है। | सर्दी में आने वाले फ्लू के बाद दिल के दौरे बढ़ने का खतरा देखा गया है, इसलिए फ्लू का टीका लगवाना फायदेमंद है। |
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q. सर्दियों में हार्ट अटैक का खतरा कितने प्रतिशत बढ़ जाता है?
Ans. विशेषज्ञों के अनुसार, सर्दियों में दिल की बीमारियों और हार्ट अटैक का खतरा गर्मी के मुकाबले लगभग 30% तक बढ़ जाता है।
Q. ठंड में ब्लड प्रेशर (BP) क्यों बढ़ जाता है?
Ans. शरीर अपनी गर्मी बचाने के लिए नसों को सिकोड़ लेता है, जिससे खून का प्रवाह बनाए रखने के लिए दिल को ज्यादा जोर लगाना पड़ता है और बीपी बढ़ जाता है।
Q. क्या सर्दियों की सुबह सैर (Walk) पर जाना सुरक्षित है?
Ans. भोर के अंधेरे और कड़ाके की ठंड में सैर करने से बचें। हमेशा धूप निकलने के बाद ही सैर पर जाएं और घर से निकलने से पहले वार्म-अप जरूर करें।
Q. जोड़ों का दर्द सर्दियों में क्यों बढ़ जाता है?
Ans. ठंड के कारण जोड़ों के बीच की चिकनाई (तरल पदार्थ) गाढ़ी हो जाती है और आसपास की मांसपेशियां सिकुड़ जाती हैं, जिससे दर्द ज्यादा होता है।
Q. हार्ट अटैक के शुरुआती लक्षण क्या हैं?
Ans. सीने में तेज दर्द या भारीपन, अचानक सांस फूलना और बिना किसी वजह के ठंडा पसीना आना हार्ट अटैक के गंभीर लक्षण हो सकते हैं।
चिकित्सा अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख सामान्य जानकारी पर आधारित है। सर्दियों में हार्ट अटैक और जोड़ों का दर्द गंभीर समस्याएं हैं। यदि आप बीपी, शुगर, हार्ट या गठिया के मरीज हैं, तो कोई भी दवा लेने या अपनी दिनचर्या में बड़ा बदलाव करने से पहले हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।






