50 हज़ार की नौकरी छोड़ शुरू किया फ्री रेंज मुर्गी पालन, आज टर्नओवर 50 लाख

इंदौर के एक MBA पास युवा ने लाखों की नौकरी छोड़ शुरू किया फ्री रेंज मुर्गी पालन। अनोखे रशियन पिंजरे और प्राकृतिक घोंसलों के जुगाड़ से आज कमा रहे हैं 50 लाख रुपये सालाना।

अगर आपसे कोई कहे कि एक MBA पास युवा 50 हज़ार रुपये महीने की अच्छी-खासी कॉर्पोरेट नौकरी छोड़कर गांव में मुर्गियां पाल रहा है, तो शायद आप यकीन न करें। लेकिन इंदौर (Indore) के ग्राम पालिया के रहने वाले सैयद मोहम्मद अली ने इसे सच कर दिखाया है। HR और मार्केटिंग में MBA कर चुके अली आज अपनी नौकरी छोड़कर फ्री रेंज मुर्गी पालन (Free Range Murgi Palan) कर रहे हैं और उनका सालाना टर्नओवर 50 से 60 लाख रुपये तक पहुंच गया है।

अपनी रुचि और लगन के दम पर उन्होंने न सिर्फ एक सफल पोल्ट्री फार्म खड़ा किया है, बल्कि मुर्गियों को पालने के लिए ऐसे-ऐसे अनोखे देसी और विदेशी जुगाड़ लगाए हैं, जिन्हें देखकर बड़े-बड़े इंजीनियर भी हैरान रह जाएं।

5000 मुर्गियों के लिए खुला खेत और ताजी सब्जियां

सैयद अली का फार्मिंग का तरीका पारंपरिक पोल्ट्री फार्म्स से बिल्कुल अलग है। उनके पास कुल 8 बीघा ज़मीन है, जिसमें से 1 बीघा में उन्होंने फार्म बनाया है और 3 बीघा ज़मीन मुर्गियों के लिए 'फ्री रेंज' (खुले में घूमने के लिए) छोड़ रखी है।

इस खुले खेत में वह मुर्गियों के लिए मक्का, ज्वार, बाजरा, मेथी, पालक और दालें उगाते हैं। जब चूजे 20 से 25 दिन के हो जाते हैं, तो उन्हें इस खुले खेत में छोड़ दिया जाता है। मुर्गियां दिन भर खेत में चरती हैं, ताजी सब्जियां और कीड़े-मकोड़े खाती हैं। इस प्राकृतिक तरीके से मुर्गियों को 50% फीड खेत से ही मिल जाता है, जिससे उनके शरीर में भरपूर प्रोटीन और मल्टीविटामिन की पूर्ति होती है और बाजार के महंगे दाने (Feed) का खर्च आधा रह जाता है।

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जंगली जानवरों से बचाने का 'रशियन पिंजरा'

फ्री रेंज पोल्ट्री फार्मिंग में सबसे बड़ी समस्या जंगली जानवरों (नेवला, सियार, जंगली बिल्ली) के हमले की होती है। इस समस्या से निपटने के लिए अली ने खुद के हाथ से ऑटोमैटिक पिंजरे बनाए हैं, जिनका मैकेनिज्म रशिया (Russia) की तकनीक पर आधारित है।

जैसे ही कोई जंगली जानवर पिंजरे में रखे मांस के टुकड़े को खाने के लिए अंदर घुसकर एक खास प्लेट पर पैर रखता है, पिंजरे का गेट अपने आप गिरकर लॉक हो जाता है। अली इन जानवरों को मारते नहीं हैं, बल्कि उन्हें सुरक्षित दूर जंगलों में छोड़ आते हैं ताकि प्रकृति का संतुलन भी बना रहे।

बांस-बल्ली और थर्माकोल से बना 3 लाख का हाईटेक फार्म

लाखों रुपये के कंस्ट्रक्शन के बजाय, अली ने मात्र 3 लाख रुपये में 150 फीट लंबा और 30 फीट चौड़ा शेड तैयार किया है। इस शेड की बीच की ऊंचाई 14 फीट और साइड 12 फीट रखी गई है।

फ्री रेंज मुर्गी पालन के नियम (Do's)क्या न करें (Don'ts)
नेचुरल फीडिंग: खुले खेत में हरी सब्जियां और घास उगाएं।सिर्फ रेडीमेड दाना: केवल बाजार के महंगे दाने पर निर्भर न रहें।
थर्माकोल इंसुलेशन: फार्म को ठंडा रखने के लिए छत पर 1.5 इंच का थर्माकोल लगाएं।बबल शीट का प्रयोग: बबल शीट न लगाएं, यह हीट कम नहीं करती।
बांस की मचान: मुर्गियों को बैठने के लिए बांस की बल्लियां बांधें।जमीन पक्की न करें: फार्म का फर्श पक्का न करें, नेचुरल मिट्टी ही रखें।

मुर्गियों को गर्मी से बचाने के लिए उन्होंने छत के नीचे बबल शीट की जगह 1.5 इंच मोटी थर्माकोल की शीट लगाई है। उनका दावा है कि इससे अंदर का तापमान 5 से 7 डिग्री तक कम हो जाता है। साथ ही, मुर्गियों के बैठने के लिए बांस की बल्लियां लगाई गई हैं क्योंकि देसी गवरान (Gawran) और सोनाली (Sonali) नस्ल की मुर्गियां जमीन के बजाय ऊंचाई पर बैठना पसंद करती हैं।

प्राकृतिक घोंसलों से 3000 अंडों का रोज़ाना उत्पादन

अंडे के उत्पादन को बढ़ाने के लिए अली ने एक और नायाब तरीका खोजा है। उन्होंने जंगल की प्राकृतिक घास से 24 खानों वाले खास घोंसले बनाए हैं। जंगली प्रवृत्ति होने के कारण मुर्गियां छुपकर अंडे देना पसंद करती हैं। इन प्राकृतिक घोंसलों में अंडे गंदे नहीं होते और सुरक्षित रहते हैं।

इस समय उनके फार्म से रोज़ाना लगभग 3,000 ऑर्गेनिक अंडे निकलते हैं, जिन्हें वह सीधे अपने फार्म से 20 रुपये प्रति अंडे के हिसाब से बेचते हैं। इसके अलावा 1.5 किलो का देसी मुर्गा 1000 रुपये में बिकता है। बीच में कोई होलसेलर न होने के कारण मुनाफा सीधा उनकी जेब में आता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1. फ्री रेंज मुर्गी पालन क्या होता है?

फ्री रेंज मुर्गी पालन वह तरीका है जिसमें मुर्गियों को दिन भर बंद पिंजरे में रखने के बजाय खुले खेतों में घूमने, चरने और प्राकृतिक आहार (कीड़े, घास) खाने के लिए छोड़ दिया जाता है।

Q2. पोल्ट्री फार्म की छत पर थर्माकोल लगाने के क्या फायदे हैं?

थर्माकोल एक बेहतरीन इंसुलेटर है। इसे टीन की छत के नीचे लगाने से गर्मियों में फार्म के अंदर का तापमान बाहर के मुकाबले काफी कम रहता है, जिससे मुर्गियां हीट स्ट्रेस से बचती हैं।

Q3. देसी मुर्गी पालन की ट्रेनिंग कहां से लें?

आप कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) से संपर्क कर सकते हैं या 'Farmex Academy' जैसे ऑनलाइन ऐप्स और यूट्यूब चैनल्स के जरिए पोल्ट्री फार्मिंग की ए टू जेड ट्रेनिंग प्राप्त कर सकते हैं।

बिज़नेस डिस्क्लेमर:

यह लेख एक सफल किसान के व्यक्तिगत अनुभव और टर्नओवर के दावों पर आधारित है। मुर्गी पालन एक जोखिम भरा बिज़नेस है, जिसमें बीमारियों से नुकसान की संभावना रहती है। कोई भी बिज़नेस शुरू करने से पहले विशेषज्ञों से उचित ट्रेनिंग (Training) और मार्केट रिसर्च अवश्य लें।

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