भूलकर भी ये 5 महिलाएं न रखें नवरात्रि का व्रत, देवी दुर्गा हो जाती हैं क्रोधित

शारदीय नवरात्रि में भूलकर भी कुछ विशेष महिलाओं को उपवास नहीं रखना चाहिए, वरना घर में दरिद्रता आ सकती है। जानिए नवरात्रि व्रत के नियम, पूजा में क्या न चढ़ाएं और कलश स्थापना का सटीक मुहूर्त।

शारदीय नवरात्रि (Shardiya Navratri) का पवित्र पर्व पूरे 9 दिनों तक माता जगदंबा की असीम कृपा पाने का सबसे बड़ा अवसर होता है। वर्ष 2026 में नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर (रविवार) से हो रही है। इस दिन घर-घर में कलश स्थापना (Kalash Sthapana) की जाएगी और 20 अक्टूबर को विजयादशमी मनाई जाएगी।

सनातन धर्म में नवरात्रि के व्रत का अत्यधिक महत्व है। लेकिन शास्त्रों के अनुसार, कुछ विशेष परिस्थितियों में महिलाओं और पुरुषों को यह व्रत भूलकर भी नहीं रखना चाहिए। अगर अनजाने में नवरात्रि व्रत के नियम (Navratri Vrat Ke Niyam) टूट जाएं, तो माता रानी रुष्ट हो सकती हैं और घर में दरिद्रता का वास हो सकता है।

किन 5 महिलाओं को भूलकर भी नहीं रखना चाहिए नवरात्रि का व्रत?

1. दिखावे के लिए पूजा करने वाली महिलाएं

जो महिलाएं केवल समाज में दिखावे (Show-off) के लिए या अपनी झूठी भक्ति का ढोंग करने के लिए व्रत रखती हैं, उनकी पूजा कभी स्वीकार नहीं होती। माता रानी केवल सच्चे और निस्वार्थ भाव की भूखी हैं। दिखावा करने वालों के घर से लक्ष्मी हमेशा के लिए चली जाती हैं।

2. अनैतिक कर्मों में लिप्त महिलाएं

शास्त्रों में स्पष्ट है कि व्यभिचारी या चरित्रहीन आचरण करने वालों को व्रत नहीं रखना चाहिए। जो लोग मर्यादाओं का उल्लंघन करते हैं, उनके अशुद्ध मन से माता की प्रतिमा स्पर्श करना भी घोर पाप माना गया है।

3. पति का अपमान करने वाली या धोखा देने वाली महिलाएं

विवाह को सात जन्मों का पवित्र बंधन माना गया है। जो महिलाएं बिना जायज वजह के अपने पति को धोखा देती हैं, सास-ससुर का अपमान करती हैं या घर में क्लेश रखती हैं, मां दुर्गा उन पर कभी अपनी कृपा नहीं बरसातीं। अखंड सौभाग्य तभी मिलता है जब पति-पत्नी दोनों निष्ठा से पूजा करें।

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4. मासिक धर्म (Periods) और सूतक काल में

सनातन परंपरा के अनुसार, मासिक धर्म या घर में सूतक/पातक (जन्म या मृत्यु) होने पर व्रत नहीं रखना चाहिए। इस दौरान मंदिर जाना या मूर्ति स्पर्श करना वर्जित है। हालांकि, अगर व्रत के बीच में मासिक धर्म आ जाए, तो आप फलाहार जारी रख सकती हैं, लेकिन पूजा केवल मानसिक रूप से 'ऐं दुर्गाय नमः' का जाप करके ही करें।

5. अत्यधिक क्रोधी और गाली-गलौज करने वाली महिलाएं

जिन महिलाओं या पुरुषों की जुबान पर हमेशा गालियां, कड़वे शब्द और दूसरों के लिए बद्दुआएं रहती हैं, उनका व्रत रखना व्यर्थ है। मां जगदंबा का वास केवल शांत और सात्विक मन में ही होता है।

बीमार लोगों के लिए क्या कहता है शास्त्र?

यदि कोई व्यक्ति मधुमेह (Diabetes), हाई ब्लड प्रेशर (BP), हृदय रोग या भयंकर कमजोरी से पीड़ित है, तो उसे हठ पूर्वक निर्जला व्रत नहीं रखना चाहिए। शरीर को कष्ट देकर की गई पूजा भगवान स्वीकार नहीं करते। आप केवल सात्विक आहार लेकर दीपक जलाकर भी माता का पूर्ण आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।

क्या करें (Do's)क्या न करें (Don'ts)
कलश स्थापना सुबह 6:19 से 10:13 के बीच करें।राहुकाल में कलश स्थापना भूलकर भी न करें।
पूजा में लाल गुड़हल, कमल और 16 श्रृंगार चढ़ाएं।दूर्वा घास, तुलसी और मदार के फूल न चढ़ाएं।
ब्रह्मचर्य का पालन करें और सात्विक भोजन खाएं।प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा और छौंक का प्रयोग न करें।
साबुत अक्षत (चावल) का ही प्रयोग करें।टूटे हुए चावल (खंडित अक्षत) भूलकर भी न चढ़ाएं।

नवरात्रि में घर लाएं ये 4 चमत्कारी चीजें

माता लक्ष्मी और कुबेर को प्रसन्न करने के लिए नवरात्रि के दिनों में ये चीजें घर लाना बेहद शुभ माना जाता है:

  1. 16 श्रृंगार का सामान: लाल चुन्नी, चूड़ियां और सिंदूर लाकर माता को अर्पित करें और फिर किसी सुहागिन को दान दें।
  2. चांदी का सिक्का या कमल: श्री गणेश और लक्ष्मी जी वाला चांदी का सिक्का तिजोरी में रखने से कंगाली दूर होती है।
  3. तांबे का कलश और गंगाजल: इसमें गंगाजल भरकर घर में छिड़काव करने से भयंकर से भयंकर वास्तु दोष और नकारात्मकता भस्म हो जाती है।
  4. मोर पंख: इसे घर में रखने से बच्चों का पढ़ाई में मन लगता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1. कलश स्थापना (घटस्थापना) का सबसे शुभ मुहूर्त क्या है?

11 अक्टूबर 2026 को कलश स्थापना का प्रातः कालीन मुहूर्त सुबह 6:19 से 10:12 तक है। इसके अलावा दोपहर 11:44 से 12:31 तक अभिजीत मुहूर्त में भी कलश स्थापित किया जा सकता है।

Q2. क्या पीरियड्स में नवरात्रि का व्रत रख सकते हैं?

शास्त्रों के अनुसार मासिक धर्म में नया व्रत शुरू नहीं करना चाहिए। यदि व्रत के बीच में पीरियड्स आ जाएं, तो उपवास जारी रख सकते हैं लेकिन मूर्ति को छूना और पूजा करना वर्जित है; केवल मानसिक जाप करें।

Q3. नवरात्रि की पूजा में माता रानी को क्या नहीं चढ़ाना चाहिए?

मां दुर्गा की पूजा में भगवान गणेश को प्रिय दूर्वा (दूब घास), तुलसी के पत्ते, मदार के फूल और टूटे हुए चावल (खंडित अक्षत) भूलकर भी नहीं चढ़ाने चाहिए।

धार्मिक/ज्योतिषीय डिस्क्लेमर:

यह लेख धार्मिक कथाओं, पुराणों और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है। बीमार या स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोग उपवास रखने से पहले अपने चिकित्सक (Doctor) से सलाह अवश्य लें। हमारा उद्देश्य केवल प्रामाणिक जानकारी आप तक पहुंचाना है।

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