अक्सर जब किसी आर्थिक रूप से कमजोर परिवार में बेटियां पैदा होती हैं, तो माता-पिता डर जाते हैं। यह डर इस बात का होता है कि बेटी की शादी के लिए बहुत सारा दहेज (Dowry) कहां से लाएंगे। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दहेज से बचने का एक ऐसा रास्ता भी है, जिसे अपनाने के बाद ससुराल पक्ष कभी आपसे दहेज मांग ही नहीं सकता? आखिर दहेज (Dahej) क्यों मांगा जाता है और बिना दहेज शादी कैसे की जा सकती है, आइए इस लेख में विस्तार से समझते हैं।
दहेज की असली परिभाषा क्या है?
हमेशा से यही माना जाता रहा है कि दहेज सिर्फ लड़की वाले देते हैं, लेकिन यह सच नहीं है। असल में, एक कमजोर पक्ष द्वारा अपने लड़के या लड़की की शादी करने के लिए मजबूत पक्ष को दिया जाने वाला सामान या धनराशि ही 'दहेज' कहलाता है।
जब लड़की वाले अपनी बेटी के लिए कोई सरकारी नौकरी वाला या मजबूत बिजनेस वाला लड़का देखते हैं, तो दोनों परिवारों के स्टेटस में जो खाई होती है, उसे पाटने के लिए पैसा या सामान (जैसे गाड़ी, कूलर आदि) दिया जाता है।
क्या लड़के वाले भी दहेज देते हैं?
हां, बिल्कुल! हरियाणा, झारखंड, पश्चिम बंगाल और नेपाल जैसे कई इलाकों में जहां लिंगानुपात (लड़कियों की संख्या) कम है, वहां हजारों लड़के कुंवारे रह जाते हैं। ऐसे में शादी करने के लिए कई लड़के वाले गरीब लड़कियों के माता-पिता को पैसे देकर उनसे शादी करते हैं। इसका मतलब साफ है कि जो पक्ष खुद को कमजोर समझता है या जिसे जरूरत होती है, वह दहेज देता है।
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मध्य प्रदेश के एक पिता की सच्ची कहानी
इस बात को एक उदाहरण से समझते हैं। मध्य प्रदेश के एक पिता ने अपनी बेटी के पैदा होने पर शादी के खर्च के लिए एक 50-60 गज का प्लॉट खरीद कर रख लिया था, ताकि बाद में उसे बेचकर शादी कर सके। लेकिन बेटी ने 12वीं और ग्रेजुएशन के बाद आईएएस की तैयारी करने की ठानी।
पिता ने प्लॉट बेचने के बजाय बेटी को पढ़ाया। कुछ समय बाद बेटी मध्य प्रदेश पीसीएस (PCS) पास करके एसडीएम (SDM) बन गई। जब उसकी शादी का वक्त आया, तो उसकी शादी एक दूसरे एसडीएम से हुई और वह भी बिना किसी दहेज के। उस पिता को अपनी बेटी की शादी के लिए कभी वह प्लॉट बेचना ही नहीं पड़ा।
| दहेज से बचने के लिए क्या करें | क्या न करें |
| बेटियों की शिक्षा पर पूरा जोर दें और उन्हें आत्मनिर्भर बनाएं। | बेटियों को सिर्फ घर के कामों (चौका-बर्तन) तक सीमित न रखें। |
| अपनी बेटी को आईएएस, डॉक्टर या किसी अच्छे मुकाम तक पहुंचाएं। | कम पढ़ी-लिखी बेटी के लिए ऊंचे स्टेटस वाले लड़के के पीछे दहेज न लुटाएं। |
| बच्चों को पढ़ाने के लिए सस्ते ऑनलाइन कोर्सेज (जैसे 99 रुपये) का फायदा उठाएं। | पढ़ाई के नाम पर लाखों रुपये महंगी कोचिंग में बर्बाद न करें। |
पैसों की कमी है तो कैसे पढ़ाएं?
कई लोग कहते हैं कि बेटियों को पढ़ाने के लिए पैसे नहीं हैं। लेकिन आज के दौर में यह कोई बहाना नहीं है। अगर आप महंगे स्कूल की फीस नहीं भर सकते, तो आप ऑनलाइन शिक्षा का सहारा ले सकते हैं।
वक्ता के अनुसार, 'कुमार एडवरटेनमेंट ऐप' (Kumar Entertainment App) पर कक्षा 9वीं से 12वीं तक के हर विषय (गणित, अंग्रेजी आदि) का ट्यूशन पूरे साल भर के लिए मात्र 99 रुपये में उपलब्ध है। यहां तक कि आईएएस (IAS) और पीसीएस की तैयारी भी सिर्फ 299 रुपये में कराई जा रही है। आप अपने मोबाइल पर ओटीपी के जरिए रजिस्टर करके बच्चों को घर बैठे, मां के हाथ का अच्छा खाना खाते हुए पढ़ा सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
दहेज असल में कौन देता है?
दहेज हमेशा वह पक्ष देता है जो शादी में खुद को दूसरे पक्ष (लड़के या लड़की) के मुकाबले कमजोर समझता है।
क्या लड़के वालों को भी कभी दहेज देना पड़ता है?
हां, जिन इलाकों में लड़कियों की संख्या कम है (जैसे हरियाणा), वहां कई बार लड़के वाले शादी करने के लिए लड़कियों के परिवार को पैसे देते हैं।
बिना दहेज के बेटी की शादी कैसे हो सकती है?
अगर बेटी को अच्छी शिक्षा देकर आईएएस, एसडीएम या डॉक्टर जैसी मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया जाए, तो कोई भी ससुराल वाला उससे दहेज नहीं मांगता।
दहेज प्रथा को हमेशा के लिए कैसे खत्म किया जा सकता है?
दहेज प्रथा को जड़ से खत्म करने का सबसे पक्का तरीका बेटियों को पढ़ाना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।
ऑनलाइन सस्ते में पढ़ाई कैसे की जा सकती है?
कुमार एडवरटेनमेंट ऐप' जैसे प्लेटफार्म्स पर 9वीं से 12वीं तक की ट्यूशन मात्र 99 रुपये और आईएएस की तैयारी 299 रुपये में की जा सकती है।










