सोने से पहले 10 मिनट करें ये खास कसरत, खर्राटे हो जाएंगे हमेशा के लिए बंद

रात को बिस्तर पर जाते समय हम सबको उम्मीद होती है कि आज चैन की नींद आएगी। लेकिन कुछ ही देर में कमरे में एक अजीब सी गड़गड़ाहट शुरू हो जाती है। आप परेशान होते हैं, करवट बदलते हैं, तकिया कान पर रखते हैं और आखिर में आपकी नींद पूरी तरह टूट जाती है।

हम अक्सर खर्राटों का जिक्र मजाक में करते हैं और कहते हैं कि "भाई साहब गहरी नींद में थे, इसलिए खर्राटे ले रहे थे।" लेकिन मेडिकल साइंस के मुताबिक यह बिल्कुल गलत है। खर्राटे आपके शरीर का इशारा हैं कि अंदर सांस की नली में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। दुनिया में आधे के करीब पुरुष और बड़ी संख्या में महिलाएं खर्राटे रोकने के उपाय तलाश रही हैं।

अगर इसे लंबे समय तक नजरअंदाज किया जाए, तो यह रिश्तों में दरार और सेहत से जुड़ी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि खर्राटे क्यों आते हैं और इन्हें जड़ से कैसे खत्म किया जा सकता है।

गले से क्यों आती है खर्राटों की तेज आवाज?

जब हम गहरी नींद में सोते हैं, तो हमारे गले की मांसपेशियां ढीली पड़ जाती हैं। अगर सांस लेने का रास्ता संकरा या छोटा हो, तो हवा गले के कोमल हिस्सों से टकराकर एक तेज कंपन (Vibration) पैदा करती है। यही कंपन खर्राटों के शोर में बदल जाता है।

बढ़ती उम्र में गले के हिस्सों का ढीला पड़ना, नाक की हड्डी का टेढ़ा होना या गर्दन का भारी होना इस रुकावट को बढ़ा देता है। इसके अलावा, बढ़ता वजन इस समस्या को तीन गुना ज्यादा खतरनाक बना देता है।

गर्दन की चर्बी सांस की नली पर बहुत ज्यादा दबाव डालती है। शराब या नींद की दवाइयां भी गले के हिस्सों को जरूरत से ज्यादा सुस्त कर देती हैं, जिससे खर्राटों का शोर और तेज हो जाता है।

क्या बीच रात में आपकी सांस रुक जाती है?

खर्राटे लेने वालों में सबसे बड़ा खतरा स्लीप एपनिया (Sleep Apnea) नाम की बीमारी का होता है। अगर खर्राटों के बीच सांस अचानक कुछ सेकंड के लिए थम जाए और आप सुबह बहुत थकान महसूस करें, तो यह शरीर में ऑक्सीजन की कमी का बड़ा संकेत है।

ऐसे में आपको तुरंत किसी स्लीप एक्सपर्ट (Sleep Expert) या डॉक्टर से मिलकर जांच करवानी चाहिए। इसे हल्के में लेना दिल की बीमारियों को न्योता देना हो सकता है।

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खर्राटे रोकने के लिए गले और जीभ की कसरत

जिम में बाइसेप्स बनाना तो आसान है, लेकिन खर्राटों से बचने के लिए गले की ताकत बढ़ाना भी बहुत जरूरी है। आप रोज 10 से 15 मिनट इन एक्सरसाइज़ को करके सांस के रास्ते को मजबूत बना सकते हैं:

  • जीभ की कसरत: अपनी जीभ की नोक को ऊपर के दांतों के पीछे लगाएं और धीरे-धीरे मुंह की छत पर पीछे की ओर ले जाएं। इसे रोज 10 बार करें।
  • शेर की दहाड़: अकेले में शेर की तरह मुंह खोलकर जीभ पूरी बाहर निकालें और गले से 'हा' की आवाज निकालें।
  • वोवेल्स (Vowels) का उच्चारण: अंग्रेजी के अक्षरों 'A E I O U' को रोज जोर-जोर से बोलें। इससे गले की मांसपेशियां पूरी तरह खुल जाती हैं।

बादाम का तेल और नेज़ल स्ट्रिप्स कितने असरदार हैं?

आयुर्वेद में नाक के रास्तों को साफ रखने के लिए 'नस्य क्रिया' (Nasya Kriya) बताई गई है। अगर आप रात को सोने से पहले अपनी नाक में बादाम तेल की 2-3 बूंदें डालते हैं, तो सांस का रास्ता नरम और चिकना हो जाता है। इससे हवा बिना किसी रगड़ के पार हो जाती है और खर्राटे कम हो जाते हैं।

वहीं, बाजार में मिलने वाली नेज़ल स्ट्रिप्स (Nasal Strips) नाक के रास्ते को बाहर की तरफ से चौड़ा कर देती हैं। जिन लोगों को एलर्जी या सर्दी की वजह से खर्राटे आते हैं, उनके लिए यह बहुत मददगार है। हालांकि, गंभीर मामलों में सीपैप (CPAP) मशीन का ही इस्तेमाल किया जाता है, जो हवा का दबाव बनाकर सांस की नली को रातभर खुला रखती है।

खर्राटों से बचने के लिए क्या करें और क्या नहीं? (Do's & Don'ts)

क्या जरूर करें (Do's)क्या बिल्कुल न करें (Don'ts)
सोते समय सिर को शरीर से थोड़ा ऊंचा रखें।रात को भारी और बहुत ज्यादा नमक वाला खाना न खाएं।
पीठ के बजाय हमेशा करवट लेकर सोने की आदत डालें।सोने से ठीक पहले शराब या सिगरेट का सेवन न करें।
सोने से 3 घंटे पहले सूप या दलिया जैसा हल्का खाना खाएं।धूल-मिट्टी वाले बिना साफ किए बिस्तर पर न सोएं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1. क्या खर्राटे आना किसी गंभीर बीमारी का संकेत है?

हां, बहुत तेज खर्राटे आना और बीच-बीच में सांस रुक जाना 'ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया' (OSA) का लक्षण हो सकता है, जिससे ब्लड प्रेशर और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ता है।

Q2. खर्राटे रोकने के लिए सोने का सही तरीका क्या है?

पीठ के बल सोने से जीभ पीछे की तरफ गिरती है और सांस का रास्ता रोकती है। हमेशा करवट लेकर (खासकर बाईं करवट) सोना खर्राटे रोकने में बहुत असरदार होता है।

Q3. क्या वजन कम करने से खर्राटे बंद हो सकते हैं?

बिल्कुल। गर्दन के आसपास जमा चर्बी सांस की नली को दबाती है। अगर आप अपना वजन 5-10% भी कम कर लें, तो खर्राटों में बहुत भारी कमी देखने को मिलती है।

मेडिकल डिस्क्लेमर:

यह लेख केवल सामान्य जानकारी और जागरूकता के लिए है। अगर आपके खर्राटों के कारण सांस रुकती है या आप दिनभर थकान महसूस करते हैं, तो कृपया तुरंत किसी कान-नाक-गले (ENT) के विशेषज्ञ या स्लीप डॉक्टर से संपर्क करें।

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