ग्रामीण इलाकों में लोग बड़ी उम्मीद से बकरी पालन (Goat Farming) शुरू करते हैं, लेकिन कुछ ही महीनों में बकरियों के बीमार पड़ने या सही ग्रोथ न होने से फार्म बंद करने की नौबत आ जाती है। एक फार्म में 10 में से सिर्फ 2 बकरियां ही बच पाती हैं। आखिर ऐसा क्यों होता है?
अमेठी (उत्तर प्रदेश) के कोहरा गांव में रिसर्च और साइंटिफिक तरीके से फार्म चला रहे कलीम भाई बताते हैं कि अगर सटीक जानकारी और सही मैनेजमेंट हो, तो गांवों में 70% और शहरों में 40-50% तक मुनाफा कमाया जा सकता है। चलिए समझते हैं कि एक सफल फार्म के पीछे शेड, नस्ल और फीडिंग का क्या गणित होता है।
बड़ी नस्लें छोड़ क्यों चुनी बरबरी बकरी?
कलीम भाई ने 2019 में सिरोही, सोजत और तोतापारी जैसी बड़ी राजस्थानी नस्लों से शुरुआत की थी। लेकिन यूपी जैसे नमी (Humidity) वाले इलाकों में ये नस्लें ज्यादा स्ट्रेस में आ जाती हैं। 40-45 डिग्री तापमान में इन्हें 'हाइपोथर्मिया' हो जाता था, जिससे इम्युनिटी कमजोर होती थी और ग्रोथ रुक जाती थी।
नुकसान से बचने के लिए उन्होंने बरबरी बकरी पर रिसर्च किया और इसे सबसे बेहतरीन पाया। इसके कई बड़े फायदे हैं:
- हाई प्रोडक्शन: यह 14 महीने में दो बार ब्यात (kidding) करती है और औसतन 3 बच्चे देती है।
- मजबूत नस्ल: यह हर तरह के क्लाइमेट, चारे और पानी में खुद को सेट कर लेती है।
- कम जगह में पालन: इसे आप एलिवेटेड शेड, ग्राउंड लेवल या छत पर भी पाल सकते हैं।
- मीट की क्वालिटी: ब्लैक बंगाल के बाद बरबरी का मीट सबसे स्वादिष्ट और सुपाच्य माना जाता है, इसलिए मार्केट वैल्यू हमेशा हाई रहती है।
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शेड मैनेजमेंट पर लाखों खर्च करने से कैसे बचें?
अक्सर नए लोग एलिवेटेड शेड (जमीन से ऊपर जालीदार फर्श) बनाने में लाखों रुपये फंसा देते हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि जहां बारिश बहुत ज्यादा होती है और पानी भरता है, सिर्फ वहीं एलिवेटेड शेड की जरूरत है। सामान्य इलाकों में आप ग्राउंड लेवल (कच्ची जमीन) पर भी फार्मिंग कर सकते हैं।
शेड का बीच का हिस्सा 12 फीट ऊंचा रखें ताकि गर्मियों में 'हीट वेव' का असर बकरियों पर कम पड़े। वेंटिलेशन के लिए 3 फीट दीवार के ऊपर जाली लगाएं। फार्म में अमोनिया गैस और नमी न बने, इसके लिए हर 10-15 दिन में जमीन पर चूने (Sodium Hypochlorite) का छिड़काव जरूर करें।
बकरियों के दाने और चारे का सही फॉर्मूला
फीडिंग के लिए CIRG मॉडल के फीडर का इस्तेमाल करें, जिसमें ऊपर मोटा भूसा और नीचे हरा चारा दिया जा सके, इससे वेस्टेज नहीं होती। एक एडल्ट बकरी को डाइट में ये चीजें जरूर दें:
- कार्बोहाइड्रेट: मक्का या चावल का खंडा।
- प्रोटीन: अरहर या चने की चुनी (मटर की चुनी में प्रोटीन ना के बराबर होता है, इसलिए उससे बचें)।
- फाइबर: गेहूं का चोकर।
- डाइजेस्टिव एंजाइम: हिमालयन बत्तीसा, मीठा सोडा और काला नमक।
- मिनरल मिक्सचर: हर जानवर को रोजाना 7-10 ग्राम मिनरल मिक्सचर जरूर दें।
मेमनों (Kids) को मरने से बचाने का सीक्रेट
बकरी पालन में जो किसान बच्चे (मेमने) नहीं बचा पाया, वो कभी फार्मिंग नहीं कर सकता। शुरुआती 20 दिनों में अगर बच्चा बीमार पड़ गया, तो वह जीवनभर सही ग्रोथ नहीं कर पाएगा।
मेमना प्रबंधन मां के गर्भ से ही शुरू हो जाता है। गाभिन बकरी को ईटी (Enterotoxemia) का वैक्सीन लगाने से बच्चा पेट में ही 50% सुरक्षित हो जाता है। जन्म के बाद नाभि को 1 इंच छोड़कर बांधें और आगे से काटकर दो दिन तक 'पोवीडोन आयोडीन' लगाएं। बच्चों को मिट्टी के संपर्क से बचाने के लिए नीचे जूट का बोरा बिछाएं या जालीदार केज में रखें।
| एलिवेटेड शेड बनाम ग्राउंड शेड | |
| एलिवेटेड शेड | ग्राउंड शेड (कच्ची जमीन) |
| बाढ़ या ज्यादा जलभराव वाले इलाकों के लिए बेहतर। | सामान्य बारिश वाले इलाकों के लिए सबसे उपयुक्त। |
| इसे बनाने का खर्च बहुत ज्यादा (डबल/ट्रिपल) आता है। | कम बजट में आसानी से तैयार हो जाता है। |
| बकरियां मिट्टी के संपर्क में नहीं आतीं। | साफ-सफाई के लिए नियमित चूने का छिड़काव जरूरी है। |
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q. बकरी पालन के लिए बरबरी नस्ल ही क्यों चुनें?
Ans. बरबरी बकरी बहुत मजबूत (हार्ड) होती है, जो किसी भी मौसम में ढल जाती है। यह 14 महीने में दो बार बच्चे देती है, जिससे किसानों को तेजी से मुनाफा मिलता है।
Q. क्या बकरियों को ग्राउंड लेवल (कच्चे शेड) पर पाला जा सकता है?
Ans. बिल्कुल, अगर आपके इलाके में पानी नहीं भरता है तो आप कच्चे फर्श पर फार्म बना सकते हैं। बस वहां नमी सोखने और कीटाणु मारने के लिए समय-समय पर चूना डालते रहें।
Q. बकरियों का वजन तेजी से कैसे बढ़ाएं?
Ans. वजन बढ़ाने के लिए डाइट में प्रोटीन (अरहर/चने की चुनी), कार्बोहाइड्रेट, फाइबर और रोजाना 7-10 ग्राम मिनरल मिक्सचर का होना बहुत जरूरी है।
Q. मेमने की नाभि पकने से कैसे रोकें?
Ans. जन्म के तुरंत बाद नाभि को 1 इंच छोड़कर बांध लें और आगे से काटकर उस पर लगातार 2 दिनों तक पोवीडोन आयोडीन लगाएं।
Q. बकरियों में सबसे बड़ी बीमारी कौन सी है?
Ans. विशेषज्ञों के अनुसार, बकरियों में सबसे खतरनाक बीमारी 'स्ट्रेस' (तनाव) है। गंदगी, गर्मी या गलत मैनेजमेंट से बकरी स्ट्रेस में आकर खाना-पीना छोड़ देती है।
विशेषज्ञ अस्वीकरण: यह लेख एक अनुभवी बकरी पालक के व्यक्तिगत अनुभवों पर आधारित है। पशुओं की बीमारी, वैक्सीनेशन या बड़े निवेश से पहले किसी प्रमाणित पशु चिकित्सक (Veterinarian) से सलाह अवश्य लें।









