अगर आपको बार-बार खुजली होती है, स्किन पर रेड रैशेज आ जाते हैं या फंगल इंफेक्शन ठीक होने के कुछ ही दिनों में वापस लौट आता है, तो यह अंदरूनी गड़बड़ी का संकेत है। एक्ने या स्किन की पुरानी समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए सिर्फ बाहरी क्रीम लगाना काफी नहीं होता।
जरा सोचिए, अगर किसी पानी की टंकी में अंदर से ही गंदगी भरी हो, तो बाहर से कितने भी फिल्टर लगा लें, पानी साफ नहीं होगा। बिल्कुल इसी तरह, अगर आपके ब्लड में इंप्योरिटीज हैं, डाइजेशन कमजोर है या लिवर ठीक से काम नहीं कर रहा है, तो स्किन की परेशानियां बार-बार लौटकर आती रहेंगी।
आखिर क्या है स्किन प्रॉब्लम्स की असली वजह?
एक्ने के मामलों में बैक्टीरिया और एक्सेस ऑयल का रोल बहुत अहम होता है। वहीं फंगल इंफेक्शंस नमी और शुगर की वजह से तेजी से पनपते हैं। एग्जिमा में इम्यून सिस्टम ओवर-रिएक्ट करने लग जाता है और एलर्जी में हिस्टामिन और इंफ्लेमेटरी मेडिएटर्स नुकसान पहुंचाते हैं।
इन सबका कॉमन जड़ होता है इंटरनल इन्फ्लेमेशन (अंदरूनी सूजन), ब्लड टॉक्सिसिटी, लिवर का ओवरलोड और पित्त-कफ का इम्बैलेंस। इन सभी समस्याओं को काबू में करने और खून को नेचुरली डिटॉक्स करने के लिए आयुर्वेद में एक खास ब्लड प्यूरीफायर नुस्खा बताया गया है।
वो 4 पावरफुल हर्ब्स जो स्किन को अंदर से करते हैं हील
यह असरदार काढ़ा सिर्फ चार आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों से मिलकर बनता है। नीम, गिलोय, मंजिष्ठा और खदिर मिलकर एक मल्टी-लेवल अप्रोच तैयार करते हैं।
- नीम: आयुर्वेद में इसे सर्व रोग निवारणी कहा गया है। फंगल इंफेक्शन, रिंगवर्म, एक्ने और इचिंग जैसी समस्याओं में नीम बहुत ज्यादा फायदेमंद माना जाता है।
- गिलोय: यह एक इम्यून मॉड्यूलेटर है। एलर्जी या एग्जिमा में जब इम्युनिटी ओवर-रिएक्ट करती है, तो गिलोय उस रिस्पांस को बैलेंस करता है।
- मंजिष्ठा: यह आयुर्वेद की सबसे बेहतरीन रक्त शोधक जड़ी-बूटी है। यह लिंफेटिक ड्रेनेज सुधारकर ब्लड डिटॉक्स करती है और पिगमेंटेशन व एक्ने स्कार्स कम करती है।
- खदिर: इसमें नेचुरल एस्ट्रिंजेंट और एंटीफंगल गुण होते हैं, जो जिद्दी खुजली और स्किन डिस्चार्ज को कंट्रोल करने में मदद करते हैं।
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घर पर आसानी से कैसे बनाएं यह आयुर्वेदिक काढ़ा?
इस काढ़े को बनाने के लिए किसी मेहनत की जरूरत नहीं है। दो कप पानी लीजिए और उसमें सात फ्रेश नीम के पत्ते डालिए। अगर ताजे पत्ते न मिलें, तो आधा चम्मच नीम की पत्तियों का पाउडर ले सकते हैं।
अब इसमें आधा चम्मच गिलोय का पाउडर (या गिलोय की बेल का 1 इंच टुकड़ा क्रश करके), आधा चम्मच मंजिष्ठा पाउडर और आधा चम्मच खदिर पाउडर मिला दीजिए। इसे हल्की आंच पर तब तक उबालें जब तक पानी दो कप से घटकर सिर्फ एक कप न रह जाए। इसके बाद गैस बंद करके इसे छान लें।
इस हल्के गर्म काढ़े को दिन में दो बार पीना है। सुबह ब्रेकफास्ट के एक घंटे बाद और शाम को करीब 4-5 बजे के आसपास इसे लेना सबसे सही रहता है। बेहतर परिणामों के लिए इसे कम से कम 21 दिन तक लगातार पिएं।
किन लोगों को नहीं पीना चाहिए यह काढ़ा?
हर नेचुरल चीज हर किसी के लिए सुरक्षित हो, ऐसा जरूरी नहीं है। प्रेग्नेंट महिलाओं को इस काढ़े का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए क्योंकि यह उनके लिए नुकसानदेह हो सकता है।
अगर आप किसी गंभीर ऑटोइम्यून बीमारी से पीड़ित हैं, तो अपने डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही इसका इस्तेमाल करें। इसके अलावा, अगर स्किन पर इन्फेक्शन इतना बढ़ गया है कि पस आने लगा है या साथ में तेज बुखार भी है, तो सिर्फ इस घरेलू नुस्खे पर निर्भर न रहें और तुरंत डॉक्टर से मिलें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q. इस काढ़े का असर कितने दिनों में नजर आने लगता है?
Ans. नियमित सेवन से 3 से 5 दिनों में खुजली से राहत मिलने लगती है। नए पिंपल्स निकलना लगभग 2 हफ्तों में कम हो जाता है और एग्जिमा में 3 से 4 हफ्तों में सुधार दिखने लगता है।
Q. क्या इस काढ़े को लंबे समय तक पिया जा सकता है?
Ans. आप इसे लगातार 21 दिनों से लेकर अधिकतम 3 महीने तक नियम के अनुसार ले सकते हैं, लेकिन बीच में गैップ देना भी जरूरी है।
Q. काढ़े के साथ स्किन केयर के लिए और क्या कर सकते हैं?
Ans. फंगल इंफेक्शन और एक्ने से पीड़ित लोग नीम के पत्तों को पानी में उबालकर उस पानी से स्नान कर सकते हैं। साथ ही, डाइट में मैदा, शुगर और स्पाइसी फूड्स से परहेज करें।
Q. क्या गिलोय पाउडर की जगह गिलोय की बेल इस्तेमाल कर सकते हैं?
Ans. बिल्कुल, अगर आपके घर में गिलोय की बेल है, तो आप उसके तने का लगभग 1 इंच का टुकड़ा अच्छी तरह क्रश करके पानी में उबालने के लिए डाल सकते हैं।
Q. दिनभर में कितना पानी पीना स्किन के लिए जरूरी है?
Ans. स्किन को अंदर से हाइड्रेटेड रखने और टॉक्सिन्स बाहर निकालने के लिए रोजाना कम से कम ढाई से 3 लीटर पानी का सेवन जरूर करें।
विशेषज्ञ अस्वीकरण: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी गंभीर त्वचा रोग या स्वास्थ्य समस्या के मामले में योग्य चिकित्सक या आयुर्वेदाचार्य की सलाह अवश्य लें।







