सोचिए आप किसी कंपनी में पिछले 19 सालों से काम कर रहे हैं और अचानक टेक्नोलॉजी बदलने के कारण आपका वह काम बंद होने की कगार पर आ जाए। ऐसे में कोई भी इंसान घबरा जाएगा। लेकिन बिहार के हाजीपुर में रहने वाले एक शख्स ने इस परेशानी को अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा मौका बना लिया। टेलीकॉम कंपनियों के टावर में 19 साल तक डीजल सप्लाई का काम करने वाले इस शख्स ने जब देखा कि टावर बिजली से चलने लगे हैं, तो उन्होंने अपना रास्ता बदल लिया।
उन्होंने यूट्यूब पर कुछ वीडियो देखे और सूअर पालन के व्यवसाय में उतरने का फैसला किया। आज से करीब तीन साल पहले उन्होंने यह कदम उठाया था और आज उनका यह फार्म उनके लिए किसी एटीएम मशीन से कम नहीं है। इस छोटे से फार्म से वह हर महीने दो से सवा दो लाख रुपये की शुद्ध बचत कर रहे हैं और अब 1500 जानवरों की क्षमता वाला एक नया और विशाल फार्म भी तैयार कर रहे हैं।

यूरोपियन नस्लों से मिल रहा है बंपर मुनाफा
इस फार्म पर मुख्य रूप से यूरोपियन नस्लों का पालन किया जाता है जिनमें लार्ज वाइट, लैंडरेस और हैम्पशायर जैसी बेहतरीन नस्लें शामिल हैं। इन नस्लों की खासियत यह है कि इनका शारीरिक विकास बहुत तेजी से होता है और ये एक बार में 12 से 16 बच्चों तक को जन्म देती हैं।
मादा सूअर का गर्भकाल लगभग 114 से 115 दिनों का होता है। इसका मतलब यह है कि एक मादा साल भर में आसानी से दो बार बच्चे दे सकती है। बच्चे जन्म लेने के 40 दिनों तक अपनी मां का दूध पीते हैं और उसके बाद उन्हें मां से अलग कर दिया जाता है। 40 दिन का होते ही एक बच्चा आसानी से 5000 रुपये में बिक जाता है। अगर एक मादा 14 बच्चे भी देती है, तो डेढ़ महीने में वह 70 हजार रुपये के बच्चे दे देती है।
साफ-सफाई और फीडिंग का खास मैनेजमेंट
सूअर पालन का नाम सुनते ही बहुत से लोगों के मन में गंदगी और बदबू का ख्याल आता है। लेकिन हाजीपुर के इस फार्म में घुसते ही यह भ्रम टूट जाता है। फार्म के गेट पर ही बायोसिक्योरिटी के लिए चूना रखा गया है और अंदर सफाई का इतना खास ध्यान रखा जाता है कि वहां बिल्कुल भी बदबू नहीं आती।
फीडिंग की बात करें तो 40 दिन के बच्चों को शुरुआत में स्टार्टर फीड दिया जाता है जो 25 किलो के पैकेट में आता है। जब जानवर बड़े हो जाते हैं तो उनके लिए फार्म पर ही फिनिशर फीड तैयार किया जाता है। इस फीड में मक्का, सोया डीओसी, राइस ब्रान, चोकर, चावल, नमक, खाने का सोडा और हल्दी पाउडर मिलाया जाता है। एक बड़े जानवर को एक बार में सवा किलो फीड दिया जाता है, यानी दिन भर में करीब ढाई किलो फीड एक जानवर खाता है।

मार्केटिंग की कोई चिंता नहीं, घर बैठे बिकता है माल
किसी भी व्यवसाय में सबसे बड़ी चुनौती अपने माल को बेचना होता है। लेकिन इस किसान का कहना है कि सूअर पालन में मार्केटिंग की कोई टेंशन नहीं है। यह व्यवसाय बिल्कुल घर में रखे एटीएम कार्ड की तरह है। आपको बस अपने प्रोडक्शन पर ध्यान देना है, खरीदार खुद आपके फार्म तक पहुंच जाएंगे।
सावन और त्योहारों के मौसम में यहां बच्चों की इतनी ज्यादा मांग होती है कि फार्म से ही 300 से 350 बच्चे आसानी से बिक जाते हैं। उनके पास नॉर्थ ईस्ट के राज्यों से भी भारी मांग आती है, लेकिन फिलहाल उनका सारा माल स्थानीय बाजार और आसपास के इलाकों में ही अच्छे दामों पर बिक जाता है।
| सूअर पालन के जरूरी नियम | क्या बिल्कुल न करें |
| फार्म में बायोसिक्योरिटी और साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखें | कम उम्र या कम वजन (80 किलो से कम) में मादा को क्रॉस न कराएं |
| हमेशा लार्ज वाइट या लैंडरेस जैसी उन्नत नस्ल ही पालें | साफ पानी और वेंटिलेशन की कमी फार्म में न होने दें |
| बच्चों को 40 दिन तक मां का दूध जरूर पिलाएं | फीड में घटिया क्वालिटी का अनाज इस्तेमाल न करें |
6 महीने में डबल हो जाती है आपकी पूंजी
अगर आप भी सूअर पालन शुरू करने की सोच रहे हैं तो यह किसान बताते हैं कि इस व्यवसाय में पूंजी बहुत तेजी से बढ़ती है। आप जितना पैसा लगाते हैं, सही मैनेजमेंट से वह 6 महीने में दोगुना हो जाता है। उन्होंने इस फार्म की शुरुआत करीब 8 लाख रुपये के निवेश से की थी।
जिनके पास अच्छी पूंजी है वे 10 जानवरों के साथ शुरुआत कर सकते हैं और जिनका बजट कम है वे 2 से 4 जानवरों से भी काम शुरू कर सकते हैं। बस जरूरी यह है कि आप लोग क्या कहेंगे, इस बात की परवाह किए बिना अपने काम पर फोकस करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
सूअर पालन शुरू करने के लिए कौन सी नस्ल सबसे अच्छी है?
लार्ज वाइट और लैंडरेस जैसी यूरोपियन नस्लें सूअर पालन के लिए सबसे बेहतरीन मानी जाती हैं क्योंकि इनका विकास तेजी से होता है और ये ज्यादा बच्चे देती हैं।
मादा सूअर साल में कितनी बार बच्चे देती है?
मादा सूअर का गर्भकाल लगभग 114 से 115 दिनों का होता है, इसलिए सही देखभाल से वह एक साल में दो बार आसानी से बच्चे दे सकती है।
सूअर के 40 दिन के बच्चे की कीमत कितनी होती है?
अच्छी नस्ल के 40 दिन के बच्चे (पिगलेट) की कीमत बाजार में आमतौर पर 5000 रुपये के आसपास होती है।
व्यावसायिक अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख एक सफल किसान के निजी अनुभवों और उनके द्वारा बताए गए मुनाफे के आंकड़ों पर आधारित है। पशुपालन व्यवसाय में बाजार के जोखिम, जानवरों की सेहत और फीड की कीमतों के अनुसार उतार-चढ़ाव आ सकते हैं। बड़े स्तर पर निवेश करने से पहले पशु चिकित्सा विभाग या किसी मान्यता प्राप्त विशेषज्ञ से उचित प्रशिक्षण अवश्य प्राप्त करें।










