नौकरी छोड़ 10 मुर्गियों से खड़ा किया 50 लाख का मुर्गी पालन बिजनेस

इंदौर के एक युवा ने 35 हजार की नौकरी छोड़कर सिर्फ 10 मुर्गियों से मुर्गी पालन शुरू किया था। आज मुर्गियों को मार्बल पत्थर खिलाकर हर साल 50 लाख का टर्नओवर बना रहे हैं।

सोचिए आप किसी ऑफिस में 35 हजार रुपये महीने की नौकरी कर रहे हैं। काम का भारी तनाव, बॉस की हर दिन की डांट और खुद के लिए कोई समय नहीं। ऐसे में कितने लोग होंगे जो अपनी जमी-जमाई नौकरी छोड़कर एक नया रिस्क लेने की हिम्मत जुटा पाएंगे? इंदौर के अली भाई ने यही हिम्मत दिखाई और आज उनका फैसला उनकी जिंदगी का सबसे बेहतरीन फैसला साबित हुआ है।

कभी 35 हजार रुपये की नौकरी करने वाले अली भाई आज अपने 5 एकड़ के फार्म हाउस में 7500 देसी मुर्गियां पाल रहे हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि उन्होंने इस मुर्गी पालन (Murgi Palan) की शुरुआत सिर्फ 10 मुर्गियों से की थी। आज उनका सालाना टर्नओवर 50 लाख रुपये तक पहुंच गया है जिसमें से वे आसानी से 15 से 20 लाख रुपये की शुद्ध बचत कर लेते हैं।

10 मुर्गियों से शुरू हुआ सफर आज है 5 एकड़ का फार्म

अली भाई बताते हैं कि उनकी शुरुआत 15 साल पहले एक छोटे से 20x36 फीट के शेड से हुई थी जिसमें उन्होंने मात्र 10 मुर्गियां रखी थीं। आज भी वह शेड उनके फार्म पर मौजूद है जो उन्हें उनके शुरुआती संघर्ष की याद दिलाता है। उनके पास अब कुल 8 बीघा यानी करीब 5 एकड़ जमीन है जिसमें उन्होंने मुर्गियों के लिए खुला जंगल और ऑर्गेनिक सब्जियां भी उगा रखी हैं।

उनके फार्म का सेटअप इतना शानदार है कि फार्म हाउस के ठीक सामने उनका नया घर है। फार्म में उन्होंने मुर्गियों को गर्मी से बचाने के लिए थर्माकोल की शीट और अमेरिका से मंगवाई गई स्पेशल फोगर मशीनें लगा रखी हैं जो एक बार में 100 नोजल चला सकती हैं। देसी मुर्गियों की आदत को ध्यान में रखते हुए उन्होंने बांस के मचान भी बनाए हैं क्योंकि देसी मुर्गियां रात में जमीन पर नहीं बल्कि ऊंचाई पर बैठना पसंद करती हैं।

मुर्गियों को मार्बल पत्थर खिलाने का अनोखा सीक्रेट

आपने मुर्गियों को दाना खाते तो बहुत देखा होगा लेकिन क्या कभी सुना है कि कोई मुर्गियों को संगमरमर के पत्थर खिलाता है? अली भाई अपनी प्योर देसी गौरान मुर्गियों को फीड में मार्बल पत्थर के छोटे टुकड़े मिलाकर देते हैं। वे बताते हैं कि मार्बल पत्थर कैल्शियम, मैग्नीशियम और फास्फोरस का बेहतरीन स्रोत होता है।

जंगली जानवरों की तरह देसी मुर्गियां भी अपनी कैल्शियम की कमी पूरी करने के लिए पत्थर खाती हैं। 100 किलो ऑर्गेनिक फीड में वे 15 से 17 किलो मार्बल पत्थर मिलाते हैं। इसके अलावा वे फीड में मक्का, डीओसी (De-Oiled Cake), हल्दी, खाने का सोडा, नमक और शाइनिंग के लिए सरसों व सोयाबीन का तेल भी डालते हैं। इसी ऑर्गेनिक फीड की बदौलत उनके मुर्गों के पंखों में गजब की चमक होती है और उनके शरीर में वेस्टेज बहुत कम निकलता है।

1500 रुपये तक में बिकता है एक देसी मुर्गा

फ्री रेंज मुर्गी पालन का सबसे बड़ा फायदा यह है कि मुर्गियां खुले में घूमती हैं और कीड़े-मकोड़े व घास खाकर अपना प्रोटीन हासिल करती हैं। इससे जानवर कड़क और फिट रहता है और उसमें बीमारियां न के बराबर आती हैं। अली भाई का कहना है कि वे 300 से 400 ग्राम का होने के बाद चूजों को फ्री रेंज में छोड़ देते हैं।

शुद्ध ऑर्गेनिक और फ्री रेंज होने के कारण उनके मुर्गों की क्वालिटी इतनी शानदार होती है कि ग्राहक 1200 से 1500 रुपये प्रति नग (मुर्गा) खुशी-खुशी देकर जाते हैं। अली भाई बताते हैं कि उनके फार्म से रोजाना 50 हजार रुपये तक की रिटेल बिक्री हो जाती है। उनके पास अंडे देने वाली मुर्गियां भी हैं जो रोजाना करीब 2000 अंडे देती हैं। गौरान मुर्गी का एक अंडा 20 रुपये में बिकता है और सर्दियों में इसकी कीमत 25 रुपये तक पहुंच जाती है।

मुर्गी पालन में अली भाई के सीक्रेट्सफायदे
फीड में मार्बल पत्थर का इस्तेमालकैल्शियम की भरपूर मात्रा मिलती है
फीड में सरसों और सोयाबीन का तेलमुर्गों की त्वचा और पंखों में गजब की चमक आती है
100% फ्री रेंज सिस्टमबीमारियां कम होती हैं और मांस की क्वालिटी बेहतर होती है
बांस की टोकरी में अंडों का भंडारणऑक्सीजन का प्रवाह बना रहता है जिससे अंडे 15-17 दिन खराब नहीं होते

सफलता का राज: खुद का बॉस बनना

अली भाई अपनी मौजूदा जिंदगी से बेहद खुश हैं। वे कहते हैं कि अब उन्हें किसी बॉस की डांट नहीं सुननी पड़ती और वे पूरी तरह से तनावमुक्त जीवन जी रहे हैं। उनका पूरा परिवार इस काम में उनका हाथ बंटाता है। उनके बेटे हैदर अली जो फुटबॉल में गोल्ड मेडलिस्ट हैं वे भी फार्म के कामों में उनकी मदद करते हैं।

नए लोगों के लिए अली भाई की सलाह है कि बिना तजुर्बे के इस काम में हाथ न डालें। वे फार्मएक्स एकेडमी जैसे संस्थानों से ट्रेनिंग लेने की सलाह देते हैं ताकि नुकसान से बचा जा सके। आज अली भाई सिर्फ एक मुर्गी पालक नहीं बल्कि उन सभी युवाओं के लिए एक मिसाल हैं जो अपनी जिंदगी में कुछ अलग और बड़ा करना चाहते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

देसी मुर्गियों को मार्बल पत्थर क्यों खिलाया जाता है? देसी मुर्गियों को कैल्शियम, फास्फोरस और मैग्नीशियम की कमी पूरी करने के लिए मार्बल पत्थर खिलाया जाता है जो उनकी सेहत और अंडों के छिलके को मजबूत बनाता है।

गौरान मुर्गी के अंडे की क्या खासियत होती है? गौरान प्योर देसी नस्ल है जिसके अंडे की योक (जर्दी) क्वालिटी बहुत शानदार होती है। इसके ऑर्गेनिक होने के कारण बाजार में यह 20 से 25 रुपये प्रति पीस बिकता है।

फ्री रेंज मुर्गी पालन के क्या फायदे हैं? फ्री रेंज में मुर्गियां खुले में घूमती हैं जिससे उनका शारीरिक विकास अच्छा होता है, बीमारियां कम लगती हैं और मांस में फैट की मात्रा न के बराबर होती है।

व्यावसायिक अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख एक सफल पोल्ट्री फार्मर के व्यक्तिगत अनुभवों और उनके द्वारा बताए गए आंकड़ों पर आधारित है। मुर्गी पालन व्यवसाय में मौसम, बीमारियों और बाजार के अनुसार जोखिम शामिल होते हैं। बड़े स्तर पर निवेश करने से पहले कृषि विज्ञान केंद्र या मान्यता प्राप्त विशेषज्ञों से उचित प्रशिक्षण (Training) अवश्य प्राप्त करें।

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