Bihar Floods ने एक बार फिर राज्य में महा-तबाही मचा दी है, जिससे 50 लाख से भी ज्यादा लोग गंभीर रूप से प्रभावित हुए हैं। बिहार की सड़कें, गांव और कई जिले पूरी तरह से डूब चुके हैं। स्कूल हो या घर, लोगों के पास सिर छुपाने के लिए कुछ भी नहीं बचा है। हालात इतने भयानक हैं कि इस वक्त राज्य की पांच प्रमुख नदियां खतरे के लाल निशान के ऊपर बह रही हैं। मौसम विभाग (IMD) ने भी इस आपदा को देखते हुए बारिश का येलो अलर्ट जारी कर दिया है और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की चेतावनी दे दी है। दोस्तों, इस वक्त बिहार में बाढ़ के बाद का मंजर बेहद डरावना और दिल दहला देने वाला है। आइए जानते हैं राज्य के किन जिलों में सबसे ज्यादा तबाही मची है और ग्राउंड जीरो पर राहत-बचाव कार्य कैसे चल रहा है।

15 जिलों और 575 पंचायतों में हाहाकार
इस साल की Bihar Floods ने राज्य के एक बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 15 जिलों की लगभग 575 पंचायतें बाढ़ के पानी से घिरी हुई हैं, जिससे करीब 50 लाख की विशाल आबादी सीधे तौर पर प्रभावित हुई है।
जिन जिलों में बाढ़ ने सबसे ज्यादा कहर बरपाया है और जहां हालात बद से बदतर हो चुके हैं, उनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
- पटना, भोजपुर और सारण
- वैशाली, भागलपुर और बेगूसराय
- बक्सर, समस्तीपुर और मुंगेर
- कटिहार, लखीसराय, खगड़िया
- पूर्णिया, मधेपुरा और अरवल
उत्तर बिहार की नदियां इस वक्त अपना रौद्र रूप दिखा रही हैं। कोसी नदी खगड़िया के बलतारा में खतरे के निशान से 114 सेमी और कटिहार के कुरसेला में 125 सेमी ऊपर बह रही है। इसके अलावा, बागमती मुजफ्फरपुर के बेनीबाद में 31 सेमी, बूढ़ी गंडक खगड़िया में 134 सेमी और घाघरा सिवान के दरौली में 34 सेमी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। नदियों के इस उफान ने Bihar Floods की स्थिति को और भी विकराल बना दिया है।
डूबे घर और नावों पर चलते अस्पताल
नुकसान का अंदाजा लगाना फिलहाल प्रशासन के लिए भी बेहद मुश्किल हो रहा है। सोशल मीडिया और न्यूज़ चैनलों पर आ रही तस्वीरों और वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि लोगों के घर पूरी तरह बाढ़ के पानी में समा चुके हैं। कई घरों के तो छप्पर तक पानी से ढक गए हैं। बच्चे नाव के सहारे स्कूल जाने को मजबूर हैं, जबकि हाईवे और मुख्य संपर्क मार्ग पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं।
लोग अपने ही गांवों में एक टापू पर कैद होकर रह गए हैं, जहां से बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं है। इंटरनेट पर एक ऐसा वीडियो भी वायरल हो रहा है जिसमें एक महिला छप्पर से बनी जुगाड़ की नाव के सहारे अपने परिवार को सुरक्षित जगह ले जा रही है। स्वास्थ्य व्यवस्था की बात करें तो Bihar Floods ने अस्पतालों को भी नहीं बख्शा है। कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में पानी भर गया है। खगड़िया जैसे अति-प्रभावित जिले में प्रशासन को नावों (Boat) पर ही चलता-फिरता अस्पताल बनाना पड़ा है, ताकि बाढ़ पीड़ितों का इलाज किया जा सके।
सरकार के राहत शिविर और सामाजिक मदद
प्रशासन अपनी ओर से बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत पहुंचाने की पूरी कोशिश कर रहा है। अब तक 10,248 सामुदायिक रसोई (Community Kitchens) और 13 राहत शिविर स्थापित किए गए हैं। इन शिविरों में हजारों लोगों के रहने, खाने-पीने और चिकित्सा की व्यवस्था की जा रही है। साथ ही, बिहार सरकार ने बाढ़ पीड़ितों के बैंक खातों में ₹7,000 की तत्काल मदद राशि (अनुग्रह अनुदान) भेजने की भी घोषणा की है।
सरकारी मदद के अलावा, कई सामाजिक कार्यकर्ता भी इस Bihar Floods में मसीहा बनकर सामने आ रहे हैं। समाजसेवी हुसैन मंसूरी गैस सिलेंडर, राशन, पीने का पानी और किताबें लेकर नाव के जरिए बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहुंचे हैं। इससे पहले उन्होंने असम बाढ़ में भी लोगों की काफी मदद की थी, और अब वे बिहारियों का दर्द बांटने ग्राउंड जीरो पर उतर चुके हैं। पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव भी लगातार जलमग्न इलाकों का दौरा कर रहे हैं और पीड़ितों को आर्थिक मदद बांटते नजर आ रहे हैं।
तेजस्वी यादव का केंद्र सरकार पर तीखा हमला
इस भयंकर Bihar Floods के बीच राज्य में सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया और एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक लंबी पोस्ट के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है।
तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि गुजरात के किसी नाले में भी पानी बढ़ जाता है तो प्रधानमंत्री वहां पहुंचते हैं और हजारों करोड़ का पैकेज दे देते हैं। उन्होंने 23 जुलाई को गुजरात में हुई बारिश का जिक्र करते हुए कहा कि वहां एक व्यक्ति की जान जाने पर पीएम और गृह मंत्री तुरंत एक्टिव हो गए, एयरफोर्स और एनडीआरएफ को लगा दिया और तुरंत 500 करोड़ का राहत पैकेज जारी कर दिया। मृतकों को 2 लाख रुपये का मुआवजा भी दिया गया।
तेजस्वी ने अपनी पोस्ट में लिखा, "अब बिहार में बाढ़ से 50 से भी ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। हजारों मवेशी बह गए, हजारों करोड़ का नुकसान हुआ और 45 लाख लोग प्रभावित हैं, लेकिन पीएम मोदी और अमित शाह के मुंह से एक शब्द नहीं निकला। क्या वे बिहार के सीएम को फालतू समझते हैं? हमारे बिहार के साथ इतना भेदभाव क्यों?" उन्होंने आगे कहा कि एनडीए के 30 सांसद और आठ केंद्रीय मंत्री भी बिहार के हक के लिए चुप बैठे हैं। चुनाव के वक्त 5 किलो राशन और पैसों का लालच देकर बिहारियों को भूल जाने की यह राजनीति बेहद शर्मनाक है।
फिलहाल, Bihar Floods का पानी भले ही कुछ इलाकों में स्थिर हो, लेकिन तबाही के निशान मिटने में सालों लग जाएंगे। मौसम विभाग के येलो अलर्ट ने चिंताएं और बढ़ा दी हैं। आप बिहार की इस स्थिति और केंद्र सरकार के रवैये पर क्या सोचते हैं? नीचे कमेंट करके जरूर बताएं।
(Ulta Chasma uc)








