अक्सर लोगों को लगता है कि मुर्गी पालन (Murgi Palan) शुरू करने के लिए 15-20 लाख रुपये के बड़े सीमेंटेड शेड और भारी इन्वेस्टमेंट की जरूरत होती है। लेकिन महाराष्ट्र (औरंगाबाद) के एक किसान ने इस मिथक को पूरी तरह तोड़ दिया है।
उन्होंने अपने 3 एकड़ के मौसमी (Mosambi) के बगीचे में उगी घास और खरपतवार को खत्म करने के लिए कुछ मुर्गियां छोड़ी थीं। आज वह बगीचा (जिसने 5 साल में 2 लाख रुपये दिए) पीछे छूट गया है, और मुर्गियों ने इस किसान को सालाना 15 से 20 लाख रुपये कमाने वाला बिजनेसमैन बना दिया है। आइए जानते हैं कि कम खर्च में मुर्गी पालन कैसे करें (Murgi palan kaise kare) और क्या है इनका 'फ्री रेंज' जुगाड़ मॉडल।
70 हजार रुपये में बना 20x40 का पोल्ट्री शेड
इस फार्म की सबसे बड़ी खासियत इसका 'लो कॉस्ट' (Low Cost) और नो मेंटेनेंस वाला मॉडल है। किसान ने 2000 मुर्गियों के लिए जो 20x40 फुट का शेड बनाया है, उसमें कोई सीमेंट, ईंट या लोहे की महंगी चादर नहीं लगी है।
शेड का पूरा ढांचा पुराने बांस-बल्ली (Second-hand material) से खड़ा किया गया है। छत के लिए 60 हजार की लोहे की चादर (पतरें) लगाने के बजाय, सिर्फ 4000 रुपये की तिरपाल (Tarpaulin) तान दी गई है (जिसकी 3 साल की गारंटी है)। साइड में जाली लगाकर, पूरा शेड मात्र 70,000 रुपये में तैयार हो गया।
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बगीचे में 'फ्री रेंज' मुर्गी पालन का डबल फायदा
इस मॉडल को 'फ्री रेंज' (Free Range Poultry) कहते हैं। दिन में मुर्गियां 3 एकड़ के बगीचे में खुली घूमती हैं। इससे दो बड़े फायदे हो रहे हैं:
- घास और वेस्टेज की सफाई: मुर्गियां बगीचे की पूरी घास, कीड़े-मकोड़े और नीचे गिरी खराब मौसमी खा जाती हैं। इससे लेबर और खरपतवार नाशक का खर्च पूरी तरह बच गया है।
- कुदरती खाद: मुर्गियों की बीट (Droppings) से पूरे बगीचे को बेहतरीन खाद मिल रही है।
सुरक्षा के लिए किसान ने पूरे 3 एकड़ की बाउंड्री लोहे के एंगल (बिना सीमेंट में गाड़े) और जाली से सिर्फ 1-1.5 लाख रुपये में कर दी है। इसके अलावा, नेवलों और चोरों से मुर्गियों को बचाने के लिए 3 जर्मन शेफर्ड कुत्ते (German Shepherds) रखे हैं, जो फार्म की कड़ी सुरक्षा करते हैं।
रोज के 1400 अंडे और लाखों की कमाई का गणित
कमाई का गणित भी बेहद शानदार है। फिलहाल किसान के पास 2500 मुर्गियां (गौरान नस्ल) अंडे दे रही हैं।
- रोज लगभग 1400 से 1500 अंडे आते हैं, जो फार्म से ही सीधे ग्राहकों को 10 रुपये प्रति अंडे के हिसाब से बिक जाते हैं। यानी रोज की कमाई 14,000 रुपये है।
- मुर्गियों को खिलाने के लिए रोज 1500 रुपये प्रति बोरी (50 Kg) के हिसाब से 4 बोरी फीड लगता है (करीब 8000 रुपये का खर्च)।
- इस तरह सभी खर्च काटकर (नए चूजों की खुराक सहित), किसान रोज 6 से 7 हजार रुपये का शुद्ध मुनाफा कमा रहा है।
- अगर कोई ग्राहक सीधे फार्म पर आता है, तो वे कोई भी मुर्गी (या मुर्गा) 500 रुपये में बेच देते हैं।
| पारंपरिक पोल्ट्री फार्म | फ्री रेंज जुगाड़ मॉडल |
| 15-20 लाख का सीमेंटेड शेड और पिंजरे। | मात्र 70 हजार में बांस और तिरपाल का शेड। |
| घास और सफाई के लिए लेबर खर्च। | मुर्गियां खुद बगीचे की घास साफ कर देती हैं। |
10 हजार मुर्गियों का टारगेट
किसान ने ऑनलाइन ट्रेनिंग ('फार्मेक्स एकेडमी' जैसी संस्थाओं से) लेकर ब्रूडिंग, वैक्सीनेशन और बायो-सिक्योरिटी की पूरी जानकारी खुद सीखी है। 2 साल के अनुभव के बाद अब उनका लक्ष्य 3 एकड़ में अलग-अलग शेड बनाकर कुल 10,000 मुर्गियां पालने का है, जिससे वे भविष्य में महीने का 2 से 5 लाख रुपये कमाने की उम्मीद कर रहे हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q. कम खर्च में मुर्गी पालन (Murgi Palan) के लिए शेड कैसे बनाएं?
Ans. आप सीमेंट या लोहे की चादर के बजाय पुराने बांस-बल्ली, साइड में जाली और छत पर अच्छी क्वालिटी की तिरपाल (Tarpaulin) लगाकर बहुत कम खर्च (लगभग 60-70 हजार) में मजबूत शेड बना सकते हैं।
Q. फ्री रेंज मुर्गी पालन के क्या फायदे हैं?
Ans. फ्री रेंज में मुर्गियां दिन भर खुले खेत या बगीचे में घूमती हैं, जिससे वे घास और कीड़े खाती हैं। मुर्गियां स्वस्थ रहती हैं और बगीचे को कुदरती खाद (बीट) मिल जाती है।
Q. खुले में मुर्गियों को नेवले या कुत्तों से कैसे बचाएं?
Ans. खेत के चारों तरफ 5 फीट ऊंची जाली की फेंसिंग करें। इसके अलावा, सुरक्षा के लिए अच्छे शिकारी कुत्ते (जैसे जर्मन शेफर्ड) पालें, जो नेवले या किसी बाहरी जानवर को फार्म में घुसने नहीं देंगे।
Q. गौरान (Gauran) मुर्गी के अंडे किस भाव बिकते हैं?
Ans. देसी या गौरान मुर्गी के अंडे की मार्केट में अच्छी डिमांड होती है। आमतौर पर ये 10 रुपये से लेकर 15 रुपये प्रति अंडे के हिसाब से सीधे फार्म से ही बिक जाते हैं।
Q. क्या एक साथ अलग-अलग उम्र के चूजे (मुर्गियां) रख सकते हैं?
Ans. वैसे तो एक ही उम्र के बैच रखना बेहतर है, लेकिन अगर चूजों की उम्र में सिर्फ 15-20 दिन का फर्क है, तो उन्हें एक ही बड़े शेड में रखा जा सकता है। इससे कोई बड़ा नुकसान नहीं होता।
विशेषज्ञ अस्वीकरण: यह जानकारी एक सफल किसान के व्यक्तिगत अनुभव और केस स्टडी पर आधारित है। मुर्गी पालन (Poultry Farming) का व्यवसाय शुरू करने से पहले स्थानीय बाजार की मांग, बीमारियों से बचाव (वैक्सीनेशन) और पशु चिकित्सा विशेषज्ञों की सलाह जरूर लें। लागत और मुनाफा आपके स्थान और प्रबंधन (Management) पर निर्भर करता है।










