एक डॉक्टर के लिए यह मान लेना बिल्कुल भी आसान नहीं होता कि वह पिछले 20 सालों से अपने मरीजों को गलत सलाह दे रहा था। अक्सर बीपी और डायबिटीज के मरीजों को यही कहा जाता है कि किशमिश मत खाइए, यह बहुत मीठी है, दांतों में चिपकती है और शुगर बढ़ा देती है।
लेकिन हाल ही में सामने आई कुछ रिसर्च ने किशमिश खाने के फायदे (Benefits of Raisins) को लेकर नजरिया पूरी तरह से बदल दिया है। दरअसल, 100 ग्राम किशमिश में लगभग 50 ग्राम शुगर होती है, जो कि काफी हाई अमाउंट है। लेकिन असली सवाल यह नहीं है कि किशमिश खाएं या नहीं। असली सवाल यह है कि शाम को जब भूख लगती है, तब आप बिस्किट या नमकीन खाते हैं या किशमिश? जब रिसर्च में किशमिश की तुलना दूसरे स्नैक्स से की गई, तो नतीजे बेहद चौंकाने वाले निकले।
5 मुख्य बातें
- स्नैक्स (बिस्किट/नमकीन) की जगह किशमिश खाने से सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर में कमी देखी गई है।
- आयुर्वेद में 'दृक्ष' कहलाने वाली किशमिश में मौजूद टार्टरिक एसिड कब्ज से राहत दिलाने में मदद करता है।
- लो टू मीडियम ग्लाइसेमिक इंडेक्स (50-64) के कारण यह ब्लड शुगर स्पाइक को कंट्रोल करने में सहायक हो सकती है।
- किशमिश में मौजूद ओलनोइक एसिड दांतों में कैविटी और मसूड़ों की बीमारी पैदा करने वाले बैक्टीरिया को रोकता है।
- आयरन को शरीर में इस्तेमाल करने के लिए किशमिश का कॉपर एक बेहतरीन पार्टनर की तरह काम करता है।
हाई ब्लड प्रेशर और कब्ज में किशमिश का असर
हाई ब्लड प्रेशर को लेकर एक 12 हफ्ते की रैंडमाइज्ड कंट्रोलोल्ड ट्रायल (RCT) की गई थी। इसमें प्री-हाइपरटेंशन वाले 46 लोगों को शामिल किया गया। जब आधे लोगों को दिन में तीन बार किशमिश दी गई और बाकियों को दूसरे स्नैक्स दिए गए, तो किशमिश खाने वालों का सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर 6 से 10 पॉइंट तक नीचे आ गया।
ऐसा इसलिए होता है क्योंकि 100 ग्राम किशमिश में लगभग 750 मिलीग्राम पोटेशियम होता है। पोटेशियम सोडियम के असर को कम करता है और ब्लड वेसल्स को रिलैक्स करता है। हालांकि, यह स्टडी कैलिफोर्निया रेजिन बोर्ड द्वारा फंडेड थी, फिर भी किशमिश में मौजूद पोटेशियम के फायदों को नकारा नहीं जा सकता। यह ब्लड प्रेशर की दवा की जगह तो नहीं ले सकती, लेकिन उसे संभालने में मदद जरूर कर सकती है।
कब्ज के मामले में तो आयुर्वेद की चरक संहिता भी इसे 'दृक्ष फलोत्तम' (फलों में सबसे उत्तम) मानती है। एक स्टडी के अनुसार, नियमित किशमिश खाने से पेट से खाना निकलने का समय 42 घंटे से घटकर 28 घंटे हो गया। इसके पीछे फाइबर और टार्टरिक एसिड (Tartaric acid) का बड़ा हाथ होता है। अगर फिर भी पेट साफ न हो, तो डॉक्टर की सलाह से इजी फ्लो सिरप जैसे विकल्प भी देखे जा सकते हैं।
डायबिटीज और दांतों से जुड़ा सबसे बड़ा मिथक
जिस बात के लिए 20 साल से मरीजों को मना किया जा रहा था, रिसर्च में उसी ने सबसे ज्यादा चौंकाया। 12 हफ्ते वाली स्टडी में यह देखा गया कि बिस्किट खाने वालों की तुलना में किशमिश खाने वालों का HbA1c (3 महीने का शुगर एवरेज) कम हुआ।
इतना ही नहीं, खाना खाने के बाद वाली शुगर (पीपी शुगर) स्नैक्स वाले ग्रुप में 6% बढ़ी, जबकि किशमिश खाने वालों में 10% घटी। इसका कारण यह है कि किशमिश का ग्लाइसेमिक इंडेक्स 50 से 64 के बीच (Low to Medium GI) होता है। इसके फाइबर और पॉलीफिनोल्स शुगर को धीरे-धीरे रिलीज करते हैं। हालांकि, डायबिटिक मरीजों को इसे बहुत सावधानी से और अपना शुगर मॉनिटर करते हुए ही लेना चाहिए।
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दांतों के मामले में भी यह धारणा गलत साबित हुई है कि किशमिश कैविटी करती है। इसमें ओलनोइक एसिड (Oleanolic acid) नाम का कंपाउंड होता है। यह स्ट्रेप्टोकोकस म्यूटेंस (कैविटी बनाने वाले) और पी जिंजिवाइटिस (मसूड़ों की बीमारी करने वाले) बैक्टीरिया को रोकने में मदद करता है।
खून की कमी दूर करने का वैज्ञानिक सच
अक्सर कहा जाता है कि किशमिश आयरन का बहुत बड़ा सोर्स है। लेकिन सच यह है कि 100 ग्राम किशमिश में सिर्फ 1.9 मिलीग्राम आयरन होता है। फिर भी इसके खाने से हीमोग्लोबिन में सुधार देखा जाता है।
इसका असली कारण है किशमिश में मौजूद कॉपर (Copper)। शरीर में सिर्फ आयरन होने से खून नहीं बनता, उसे इस्तेमाल करने के लिए कॉपर की जरूरत होती है। किशमिश एक पार्टनर की तरह काम करती है जो उस कॉपर की सप्लाई देकर आयरन को शरीर में ठीक से अब्जॉर्ब होने में मदद करती है।
किशमिश से जुड़े कुछ मिथक और सच
| मिथक (Myths) | सच्चाई (Facts) |
| रोजाना सिर्फ 5 दाने खाने चाहिए | रिसर्च के अनुसार 30-40 ग्राम (एक छोटी मुट्ठी) फायदेमंद है। |
| मीठी होने के कारण दांत सड़ाती है | ओलनोइक एसिड के कारण दांतों और मसूड़ों को सुरक्षित रखती है। |
| हमेशा भिगोकर ही खाना चाहिए | रिसर्च में सूखी किशमिश इस्तेमाल हुई थी, हालांकि बुजुर्ग भिगोकर खा सकते हैं। |
| खून बढ़ाने के लिए आयरन का मुख्य सोर्स है | इसमें कॉपर होता है जो आयरन को अब्जॉर्ब करने में मदद करता है। |
किशमिश खाने का सही तरीका और मात्रा
परंपराओं के अनुसार लोग 5 या 8 दाने भिगोकर खाते हैं, जिसका वजन सिर्फ 2-3 ग्राम होता है। रिसर्च में लोगों को 90 ग्राम से 120 ग्राम तक किशमिश दी गई थी। प्रेक्टिकली आपको रोजाना 30 से 40 ग्राम यानी लगभग एक छोटी मुट्ठी (25-30 दाने) किशमिश खानी चाहिए। ध्यान रहे, इसे अपनी डाइट में ऊपर से नहीं जोड़ना है, बल्कि किसी अनहेल्दी स्नैक की जगह इसे रिप्लेस करना है।
बाजार में मिलने वाली गोल्डन किशमिश का रंग हल्का करने के लिए अक्सर सल्फर डाइऑक्साइड का इस्तेमाल होता है, जिससे अस्थमा के मरीजों को दिक्कत हो सकती है। इसलिए काली या गहरी भूरी किशमिश को ज्यादा बेहतर माना जाता है, जिसमें आयरन भी दोगुना होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
क्या हम रोजाना किशमिश खा सकते हैं?
जी हां, अगर आप इसे अनहेल्दी स्नैक्स की जगह लेते हैं, तो रोजाना एक छोटी मुट्ठी (लगभग 30-40 ग्राम) किशमिश खाई जा सकती है।
काली किशमिश और पीली किशमिश में कौन सी बेहतर है?
अध्ययनों के अनुसार काली (गहरे रंग वाली) किशमिश ज्यादा बेहतर है क्योंकि इसमें आयरन ज्यादा होता है और यह सल्फर डाइऑक्साइड जैसे केमिकल से मुक्त होती है।
क्या डायबिटीज के मरीज किशमिश खा सकते हैं?
कुछ रिसर्च बताती हैं कि इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स लो-टू-मीडियम होता है, लेकिन डायबिटीज के मरीजों को इसे बहुत ही सीमित मात्रा में और अपनी शुगर मॉनिटर करते हुए लेना चाहिए।
क्या किशमिश को हमेशा भिगोकर खाना जरूरी है?
यह पूरी तरह आपकी पसंद और डाइजेशन पर निर्भर है। रिसर्च में सूखी किशमिश इस्तेमाल हुई थी, लेकिन कमजोर पाचन वाले या बुजुर्ग इसे भिगोकर खा सकते हैं।
किशमिश कब्ज में कैसे मदद करती है?
इसमें फाइबर के साथ-साथ टार्टरिक एसिड मौजूद होता है, जो आंतों की मूवमेंट को तेज करके खाना पचने और पेट साफ होने की प्रक्रिया को आसान बनाता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी और विभिन्न अध्ययनों के आधार पर लिखा गया है। यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। अगर आपको डायबिटीज, हाई बीपी या कोई अन्य स्वास्थ्य समस्या है, तो अपनी डाइट में कोई भी बड़ा बदलाव करने से पहले हमेशा अपने डॉक्टर या विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।






