क्या होली, दिवाली, दशहरा या छठ पर घर जाने के लिए आपने कभी खुद से तत्काल टिकट बुकिंग (Tatkal ticket booking) करने की कोशिश की है? सुबह 9:55 बजे से आप लैपटॉप खोलकर बैठते हैं, पेज रिफ्रेश करते हैं और ठीक 10 बजते ही जब तक आप 'कैप्चा' भरते हैं, सारे टिकट गायब हो जाते हैं।
सबसे बड़ी हैरानी की बात यह है कि जो टिकट आपको वेबसाइट पर नहीं मिलता, वही टिकट आपके मोहल्ले का एजेंट 500 से 1000 रुपये एक्स्ट्रा लेकर आपको तुरंत दे देता है। आखिर यह जादू होता कैसे है? क्या आम आदमी कभी आईआरसीटीसी (IRCTC) से खुद कन्फर्म टिकट नहीं निकाल सकता? आइए इस पूरे खेल को समझते हैं।
पहले मिनट में ही खत्म हो जाते हैं टिकट
रेलवे के आंकड़ों के अनुसार, एसी तत्काल में रोज करीब 1,88,000 टिकट बुक होते हैं। रेलवे दावा करता है कि पहले मिनट में सिर्फ 5,615 टिकट बिकते हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि भीड़-भाड़ वाले रूट्स (जैसे दिल्ली से पटना या दरभंगा) पर पहले 10 मिनट में ही 10 में से 6 से ज्यादा टिकट गायब हो जाते हैं।
स्लीपर क्लास की बात करें तो पहले घंटे में ही 100 में से 84 टिकट खत्म हो जाते हैं। आम जनता की सबसे बड़ी शिकायत यही है कि बुकिंग खुलते ही उनके हाथ सिर्फ 'वेटलिस्ट' (Waitlist) लगती है और उनके पैसे कट कर बीच में ही फंस जाते हैं।
कैसे काम करता है दलालों का 'सुपरफास्ट' सॉफ्टवेयर?
जब आप अपना नाम और उम्र टाइप कर रहे होते हैं, तब दलाल गैर-कानूनी सॉफ्टवेयर (Illegal Bots) का इस्तेमाल करते हैं। आरपीएफ (RPF) ने पिछले कुछ सालों में ANMS Mac, Jaguar, Dragon, JeteX, Ocean और Black Turbo जैसे कई ऑटो-फिल बॉट्स पकड़े हैं।
यह सॉफ्टवेयर इंसान और मशीन का फर्क पहचानने वाले 'कैप्चा' (Captcha) को अपने आप पार कर लेते हैं। आम आदमी को पूरा फॉर्म भरने में जितना समय लगता है, ये सॉफ्टवेयर उस काम को एक मिनट से भी कम समय में कर देते हैं। तत्काल की लड़ाई में 10 सेकंड का अंतर ही हार और जीत तय कर देता है। ये सॉफ्टवेयर बाजार में 999 रुपये से लेकर 5000 रुपये तक में बिकते हैं।
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रेलवे ने क्या कदम उठाए हैं?
इस रैकेट को रोकने के लिए रेलवे ने कई कड़े कदम उठाए हैं। ऑथराइज्ड एजेंट्स पर सुबह बुकिंग खुलने के पहले 30 मिनट तक तत्काल टिकट काटने पर रोक लगाई गई है। साथ ही, वेबसाइट पर 'अकमाई' (Akamai) नाम का एंटी-बॉट सिस्टम लगाया गया है।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) ने संसद में बताया था कि सिस्टम ने करोड़ों बॉट रिक्वेस्ट को ब्लॉक किया है। आईआरसीटीसी ने 3 करोड़ से ज्यादा संदिग्ध आईडी (IDs) को ब्लॉक भी किया है। लेकिन दलालों ने इसका भी जुगाड़ निकाल लिया है और टेलीग्राम-व्हाट्सएप पर वेरीफाइड आईडी बेची जाने लगी हैं।
हाई कोर्ट में पहुंचा तत्काल का मामला
अब यह पूरा मामला हाई कोर्ट की चौखट पर है। अदालत में याचिका लगाई गई है कि तत्काल खुलते ही आईआरसीटीसी की वेबसाइट और ऐप अचानक धीमे (Slow) क्यों पड़ जाते हैं। लोगों के खाते से पैसे कट जाते हैं, लेकिन टिकट बुक नहीं होता।
याचिकाकर्ताओं की मांग है कि पूरे रिजर्वेशन सिस्टम की किसी स्वतंत्र संस्था (Independent Audit) से जांच कराई जाए। रिफंड में लगने वाले 3-4 दिन के समय के कारण कई लोगों के पास दूसरा टिकट बुक करने के पैसे भी नहीं बचते। जब तक पैसा लौटता है, तब तक ट्रेन जा चुकी होती है।
| तत्काल टिकट की हकीकत | आम आदमी का नुकसान |
| बुकिंग स्पीड | बॉट सॉफ्टवेयर सेकंडों में फॉर्म भर देते हैं, इंसान पीछे रह जाता है। |
| एक्स्ट्रा फीस | मजबूरी में यात्रियों को एजेंट को 500-1000 रुपये एक्स्ट्रा देने पड़ते हैं। |
| रिफंड की समस्या | टिकट बुक न होने पर पैसा कटता है, जिसे वापस आने में 3-4 दिन लगते हैं। |
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1. तत्काल टिकट बुकिंग का समय क्या है?
एसी (AC) क्लास के लिए तत्काल बुकिंग सुबह 10:00 बजे और स्लीपर (Sleeper) क्लास के लिए सुबह 11:00 बजे शुरू होती है। यह सफर से ठीक एक दिन पहले खुलता है।
Q2. तत्काल टिकट बुक करते समय पैसा कट जाए तो क्या करें?
अगर आपके खाते से पैसा कट गया है और टिकट बुक नहीं हुआ है, तो आईआरसीटीसी के नियमों के अनुसार 3 से 4 कार्य दिवसों (Working Days) के भीतर पूरा पैसा आपके उसी बैंक खाते में रिफंड कर दिया जाता है।
Q3. क्या तत्काल टिकट कैंसिल करने पर रिफंड मिलता है?
नहीं, अगर आपका तत्काल टिकट 'कन्फर्म' है और आप उसे अपनी मर्जी से कैंसिल करते हैं, तो रेलवे कोई रिफंड नहीं देता है। सिर्फ वेटिंग तत्काल टिकट कैंसिल होने पर रिफंड मिलता है।
सूचना/डिस्क्लेमर:
यह लेख मीडिया रिपोर्ट्स, जनहित याचिका और रेलवे द्वारा जारी आंकड़ों पर आधारित है। टिकट बुकिंग से जुड़े सभी आधिकारिक नियमों और बदलावों के लिए कृपया हमेशा IRCTC की आधिकारिक वेबसाइट (irctc.co.in) को ही चेक करें।







