छठ पूजा 2026: नहाय-खाय से लेकर अर्घ्य तक, जानें 36 घंटे के निर्जला व्रत के कड़े नियम!

By: Mukul Kumar Mk Singh

OCTOBER 30, 2026

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दिवाली के बाद अब आस्था के सबसे बड़े महापर्व 'छठ पूजा' की तैयारियां शुरू हो गई हैं। क्या आप इस 36 घंटे के कठिन व्रत के कड़े नियम जानते हैं?

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छठ पूजा दुनिया का इकलौता ऐसा त्योहार है, जिसमें सिर्फ उगते हुए सूरज को ही नहीं, बल्कि डूबते हुए सूरज को भी पूजा जाता है।

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नहाय-खायइस दिन घर की साफ-सफाई करके शुद्ध शाकाहारी भोजन (कद्दू की सब्जी, चने की दाल और अरवा चावल) बनाया जाता है।

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पहला दिन:

खरनाशाम को मिट्टी के नए चूल्हे पर आम की लकड़ी से गुड़ की खीर बनती है। इसे खाने के बाद ही 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू होता है।

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दूसरा दिन:

संध्या अर्घ्यव्रती पूरे परिवार के साथ घाट पर जाते हैं और बांस के सूप में फल-ठेकुआ सजाकर डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देते हैं।

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तीसरा दिन:

उषा अर्घ्य अगली सुबह तड़के उगते हुए सूरज को अर्घ्य दिया जाता है। इसके बाद व्रत खोला जाता है, जिसे 'पारण' कहते हैं।

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चौथा दिन:

छठ के दौरान पूरे घर में लहसुन, प्याज या मांसाहार का प्रवेश पूरी तरह वर्जित होता है। व्रती तो दूर, परिवार भी इसे नहीं खा सकता।

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नियम 1: लहसुन-प्याज है सख्त मना!

प्रसाद का गेहूं धोने से लेकर पीसने तक, सब कुछ बहुत शुद्धता से होता है। बिना नहाए पूजा के सामान को छूना मना है।

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नियम 2: शुद्धता है सबसे ऊपर

खरना का प्रसाद खाते समय व्रती के कमरे में बिल्कुल सन्नाटा होना चाहिए। अगर कोई आवाज कानों में पड़ जाए, तो व्रती खाना वहीं छोड़ देते हैं।

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नियम 3: शांति से प्रसाद ग्रहण

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छठी मईया आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी करें! जय छठी मईया।