नवरात्रि के दिनों में अक्सर घरों में काले चने का प्रसाद बनता है। मौसम बदलते समय जब शरीर को मजबूत इम्युनिटी की जरूरत होती है, तब काले चने हमारी परंपरा का अहम हिस्सा बन जाते हैं। काले चनों को अंग्रेजी में 'चिकपी' (Chickpea) या 'बेंगल ग्राम' (Bengal gram) कहा जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि काले चने के फायदे (Kale Chane Ke Fayde) सिर्फ भूख मिटाने तक सीमित नहीं हैं? यह आपके दिल, दिमाग और पेट के लिए एक सुपरफूड की तरह काम करता है।
5 मुख्य बातें
- काले चनों की तासीर गर्म होती है, जो इंस्टेंट एनर्जी देने के साथ ही शरीर में तेजी से खून बनाते हैं।
- 100 ग्राम सूखे काले चने में लगभग 19 से 22 ग्राम प्रोटीन और 9-10 ग्राम डाइटरी फाइबर पाया जाता है।
- इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) 28 होता है, इसलिए डायबिटीज के मरीज इसे आराम से खा सकते हैं।
- इसमें मौजूद 'कोलिन' (Choline) नामक तत्व दिमाग को तेज करता है और मूड को बेहतर बनाता है।
- बिना भिगोए खाने से गैस बन सकती है; इसे कम से कम 12 से 24 घंटे भिगोना जरूरी है।
काले चने बनाम सफेद चने (काबुली चने)
अक्सर लोग काले चने और सफेद चने (काबुली चना) में कन्फ्यूज रहते हैं। काले चने साइज में छोटे होते हैं और इनका छिलका थोड़ा रफ और डार्क (लाल-भूरा) होता है। यह डार्क रंग इसके अंदर मौजूद पावरफुल एंटीऑक्सीडेंट्स (जैसे एंथोसाइनाइड्स) की वजह से होता है, जो बीमारियों से लड़ते हैं।
दूसरी तरफ, काबुली चना बड़ा और हल्के रंग (स्किन कलर) का होता है, जिसका फ्लेवर माइल्ड होता है। सफेद चने वजन कम करने (Weight Management) में बहुत अच्छे माने जाते हैं, लेकिन अगर ओवरऑल न्यूट्रिशन की बात करें, तो काले चने ज्यादा बेहतर (Better) होते हैं।
खून की कमी और कोलेस्ट्रॉल का पक्का इलाज
भारत में महिलाओं में खून की कमी (एनीमिया) एक आम समस्या है, जिसके कारण आलस और वीकनेस रहती है। काले चने में भरपूर मात्रा में आयरन, फोलेट और विटामिन सी होता है, जो शरीर में तेजी से हीमोग्लोबिन बढ़ाता है।
इसके अलावा, इसमें मौजूद फाइबर शरीर में जाकर एक केमिकल 'ब्यूटायरेट' (Butyrate) बनाता है, जो आंतों की सूजन (Inflammation) को कम करता है। जानकारों के अनुसार, काले चने में 'साइटोस्टेरोल्स' (Cytosterols) भी पाया जाता है, जो खराब कोलेस्ट्रॉल को ब्लड में मिक्स होने से रोकता है और हार्ट अटैक के खतरे को कम करता है।
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काले चने खाने से गैस क्यों बनती है?
कई लोगों की शिकायत होती है कि काले चने खाने से पेट में गैस बन जाती है। इसका एक वैज्ञानिक कारण है। काले चने में 'फाइलेट्स' और 'ओलिगोसैकराइड्स' (Oligosaccharides) नाम के कॉम्प्लेक्स शुगर होते हैं, जिन्हें पचाना थोड़ा मुश्किल होता है और इसी वजह से गैस बनती है।
| क्या करें | क्या न करें |
| काले चने को पकाने से पहले 12 से 24 घंटे तक पानी में जरूर भिगोएं। | बिना भिगोए या अधपके काले चने खाने की गलती बिल्कुल न करें। |
| गैस से बचने के लिए इसे अदरक, लहसुन, हींग और जीरा के साथ पकाकर खाएं। | गर्मियों में जरूरत से ज्यादा काले चने (इसकी तासीर गर्म होती है) न खाएं। |
| डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल के मरीज इसे अपनी डाइट में शामिल करें। | यूरिक एसिड, गठिया या किडनी की गंभीर बीमारी में डॉक्टर से पूछकर ही खाएं। |
दिमाग तेज करने का नेचुरल सोर्स
शायद आप यह जानकर हैरान रह जाएं कि काले चने दिमाग के लिए भी एक टॉनिक हैं। यह 'कोलिन' (Choline) का नेचुरल सोर्स है। जब आप इसे खाते हैं, तो यह दिमाग में 'एसिटाइल कोलिन' (एक न्यूरोट्रांसमीटर) बनाने में मदद करता है। इससे न सिर्फ आपकी मेमोरी शार्प (तेज) होती है, बल्कि आपका मूड भी अच्छा रहता है।
किन लोगों को काले चने संभलकर खाने चाहिए?
यूं तो काले चने अमृत के समान हैं, लेकिन अगर किसी का यूरिक एसिड बहुत ज्यादा बढ़ा हुआ है, गठिया की बीमारी है, या लंबे समय से किडनी डैमेज (या स्टोन) की समस्या है, तो उन्हें इसका सेवन बहुत सावधानी से करना चाहिए। इसके अलावा, डायरिया या कमजोर डाइजेशन वालों को भी अपने डॉक्टर या डाइटिशियन से सलाह लेकर ही काले चने खाने चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
काले चने को खाने से पहले भिगोना क्यों जरूरी है?
काले चने में कुछ कॉम्प्लेक्स शुगर (ओलिगोसैकराइड्स) होते हैं जो गैस बनाते हैं। भिगोने से ये तत्व टूट जाते हैं और इन्हें पचाना आसान हो जाता है।
क्या डायबिटीज के मरीज काले चने खा सकते हैं?
हां, काले चने का ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) 28 के आसपास होता है, जो बहुत कम है। इसलिए डायबिटीज के मरीज इसे आराम से खा सकते हैं।
100 ग्राम सूखे काले चने में कितना प्रोटीन होता है?
100 ग्राम सूखे काले चने में लगभग 19 से 22 ग्राम प्रोटीन और 35 से 60 ग्राम कार्बोहाइड्रेट पाया जाता है।
काले चने और काबुली चने में से कौन सा ज्यादा फायदेमंद है?
हालांकि दोनों ही सेहत के लिए अच्छे हैं, लेकिन पोषक तत्वों और एंटीऑक्सीडेंट्स की मात्रा के हिसाब से काले चने ज्यादा फायदेमंद (Better) माने जाते हैं।
काले चने खाने से दिल की बीमारियां कैसे कम होती हैं?
काले चने में हाई डाइटरी फाइबर और साइटोस्टेरोल्स होते हैं, जो खराब कोलेस्ट्रॉल को खून में घुलने से रोकते हैं, जिससे नसों में ब्लॉकेज का खतरा कम होता है।






